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चार दिनों में 2500 अंक से ज्यादा गिरा सेंसेक्स, इनवेस्टर्स के डूबे 8 लाख करोड़

  शेयर बाजार में लगातार गिरावट जारी है और हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिनों में भी ये गिरावट देखने को मिल रही है। जिसकी वजह से इक्विटी निवेशकों की संपदा में 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी दर्ज की गई है। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 700 अंक टूटा। पहले मिनट में निवेशकों के करीबन 2.5 लाख करोड़ रुपए डूब गए। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 194.10 अंक या 1.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,562.90 पर कारोबार कर रहा था। दूसरी तरफ पॉवरग्रिड और एचयूएल के शेयर लाभ में रहे। पिछले सत्र में तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 634.20 अंक यानी 1.06 प्रतिशत लुढ़ककर 59,464.62 पर बंद हुआ। ऐसे आपको इस गिरावट के प्रमुख कारणों से अवगत कराते हैं।  वैश्विक बाजारों में नकारात्मक रूख और विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी के कारण से दुनिया भर के बाजार गिरावट में हैं। अमेरिका की फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढोतरी की उम्मीद में ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में उछाल की वजह से निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं और जिसकी वजह से अपने पोर्टफोलियो में कम रिस्की असेट्स शामिल कर रहे हैं।  न केवल अमेरिका में

उत्तराखंड: कोविड-19 प्रोटोकॉल के साथ 13 दिसंबर से पर्यटकों के लिए खुल जाएगा एफआरआई

  


देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) कोविड-19 प्रोटोकॉल के पालन के साथ 13 दिसंबर से पर्यटकों के लिए फिर से खुल जाएगा। रोजाना सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक केवल 200 लोगों को परिसर में आने की अनुमति होगी।सभी पर्यटक अपना पंजीकरण संस्थान की बेवसाइट fri.icfre.gov.in पर कर सकते हैं। इससे संबंधित समस्त जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध है। संस्थान में सुबह और शाम की वॉक के लिए एफआरआई परिसर पहले की तरह ही खुला रहेगा।पिछले दिनों आईएफएस अफसरों के संक्रमित मिलने के बाद एफआरआई में पर्यटकों का प्रवेश बंद कर दिया गया था। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में मिड टर्म प्रशिक्षण लेने आए गुजरात, झारखंड, हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों के 11 वरिष्ठ आईएफएस अधिकारियों के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद वन अनुसंधान संस्थान में पर्यटकों और मॉर्निंग वॉकर्स समेत तमाम बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी।संस्थान निदेशक अरुण सिंह रावत की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए थे। सिर्फ संस्थान के अधिकारियों, र्वैज्ञानिकों और कर्मचारियों को ही परिसर में दाखिल होने की इजाजत थी।कोरोना की पहली लहर होने के बाद संस्थान परिसर को लगातार दो साल तक पर्यटकों और मॉर्निंग वॉकर्स के लिए बंद रखा गया था। हालात सामान्य होने के बाद संस्थान निदेशक पर की ओर से मॉर्निंग वाकर्स और पर्यटकों के लिए संस्थान परिसर को खोला गया था।



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