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लखीमपुर खीरी हिंसा: जांच कर रही एस.आई.टी ने चश्मदीद गवाहों से साक्ष्य देने के लिए निकाला विज्ञापन

    लखनऊ  /   लखीमपुर हिंसा कांड में उत्तर प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी गवाहों को सुरक्षा देने के निर्देश के बाद विशेष अनुसंधान दल (एसआइटी) ने जांच की गति और तेज कर दी है। एसआइटी ने चश्मदीद गवाहों से साक्ष्य देने का अनुरोध करते हुए विज्ञापन निकाला है। विज्ञापन में एसआइटी अपने सदस्यों के संपर्क नंबर जारी किया है। प्रत्यक्षदर्शियों से आगे आकर अपने बयान दर्ज कराने और डिजिटल साक्ष्य प्रदान करने के लिए उनसे संपर्क करने का आग्रह करती किया है। एसआइटी का कहना है कि ऐसे लोगों की जानकारी गोपनीय रखी जाएगी और उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाएगी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के सभी गवाहों को गवाह सुरक्षा योजना, 2018 के मुताबिक पुलिस सुरक्षा दी जाए। साथ ही कोर्ट ने अन्य महत्वपूर्ण गवाहों के बयान भी सीआरसीपी की धारा-164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष जल्द दर्ज कराने का निर्देश देते हुए कहा कि अगर बयान दर्ज करने के लिए मजिस्ट्रेट उपलब्ध नहीं हैं तो जिला जज नजदीक के मजिस्ट्रेट से बयान दर्ज कराएंगे। इसके अलावा कोर्ट ने हिंसा म

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद हालात गंभीर

संयुक्त राष्ट्र / संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद पैदा हुए हालात पर मंगलवार को चर्चा करेगी और पिछले साल नवंबर में देश में हुए आम चुनाव में लोगों द्वारा व्यक्त की गई इच्छा का सम्मान करने पर विचार के साथ ही उठाए जा सकने वाले कदमों पर चर्चा करेगी। फरवरी के लिए सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष ब्रिटेन म्यांमा पर चर्चा के लिए बंद दरवाजे में बैठक आयोजित करेगा। इस दौरान म्यांमा के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष दूत क्रिस्टीन श्रानेर बर्गनर भी संभवत: अपने विचार रखेंगी। संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन की स्थायी प्रतिनिधि और इस महीने के लिए सुरक्षा परिषद की अध्यक्ष बारबरा वुडवर्ड ने एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हम शांति एवं सुरक्षा को लेकर पैदा हुए दीर्घकालीन खतरे से म्यांमा के एशियाई और आसियान पड़ोसियों के साथ निकटता से काम करके निपटना चाहते हैं।’’ उन्होंने कहा कि पूर्व में म्यांमा पर इस सप्ताह के अंत में परिषद में वार्ता होनी थी, लेकिन देश में हाल में हुए घटनाक्रम के कारण यह चर्चा मंगलवार को होगी। इससे पहले परिषद ने नवंबर में हुए चुनाव से पहले सितंबर 2020 में म्यांमा पर चर्चा की थी। उल्लेखनीय है कि म्यांमा में सेना ने सोमवार को तख्तापलट कर दिया और शीर्ष नेता आंग सान सू ची समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। पांच दशकों तक सैन्य शासन में रहे इस देश में सैन्य तख्तापलट की दुनिया के विभिन्न देशों और संगठनों ने निंदा की है और हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा करने की मांग की है। Sources:Agency News

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