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लखीमपुर खीरी हिंसा: जांच कर रही एस.आई.टी ने चश्मदीद गवाहों से साक्ष्य देने के लिए निकाला विज्ञापन

    लखनऊ  /   लखीमपुर हिंसा कांड में उत्तर प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी गवाहों को सुरक्षा देने के निर्देश के बाद विशेष अनुसंधान दल (एसआइटी) ने जांच की गति और तेज कर दी है। एसआइटी ने चश्मदीद गवाहों से साक्ष्य देने का अनुरोध करते हुए विज्ञापन निकाला है। विज्ञापन में एसआइटी अपने सदस्यों के संपर्क नंबर जारी किया है। प्रत्यक्षदर्शियों से आगे आकर अपने बयान दर्ज कराने और डिजिटल साक्ष्य प्रदान करने के लिए उनसे संपर्क करने का आग्रह करती किया है। एसआइटी का कहना है कि ऐसे लोगों की जानकारी गोपनीय रखी जाएगी और उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाएगी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के सभी गवाहों को गवाह सुरक्षा योजना, 2018 के मुताबिक पुलिस सुरक्षा दी जाए। साथ ही कोर्ट ने अन्य महत्वपूर्ण गवाहों के बयान भी सीआरसीपी की धारा-164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष जल्द दर्ज कराने का निर्देश देते हुए कहा कि अगर बयान दर्ज करने के लिए मजिस्ट्रेट उपलब्ध नहीं हैं तो जिला जज नजदीक के मजिस्ट्रेट से बयान दर्ज कराएंगे। इसके अलावा कोर्ट ने हिंसा म

गजब-12 बच्चों को पोलियो ड्रॉप की जगह पिला दिया गया सैनिटाइजर,3अधिकारी निलंबित

अफसारों की लापरवाही का क्या कहना इन लोगों की उदासीनता से नौनिहालों का जीवन खतरे में पडऋ रहा है, इसका जीता जागता उदाहरण महाराष्ट्र के यावतमाल में देखने को मिला जहां पांच साल से कम उम्र के 12 बच्चों को पोलियो की दवा की बजाय सैनिटाइजर पिलाने के बाद सोमवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस मामले की जानकारी यावतमाल डिस्ट्रिक्ट काउंसिल चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर श्रीकृष्ण पांचाल ने दी। अधिकारी के मुताबिक ये सभी बच्चें अब ठीक हैं। उन्होंने बताया कि एक स्वास्थ्य कर्मी, एक डॉक्टर और एक आशा वर्कर को इस मामले में निलंबित किया गया है। श्रीकृष्ण पांचाल ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया,यावतमाल में पांच साल से कम उम्र के 12 बच्चों को पोलियो की बूंदों के बजाय सैनिटाइजर की ड्रॉप्स दे दी गईं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और फिलहाल वे ठीक हैं। आपको बता दें कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 30 जनवरी को साल 2021 के लिए पल्स पोलियो अभियान शुरू किया था।स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, भारत में बीते एक दशक से पोलियो का कोई मामला नहीं आया है। भारत में पोलियो का आखिरी मामला 13 जनवरी 2011 को आया था। हालांकि देश में पोलियो को दोबारा पैर पसारने से रोकने के लिए सरकार सतर्क है क्योंकि भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान और पाकिस्तान में यह बीमारी अभी भी मौजूद है। इसलिए पोलियो को हराने के लिए साल में दो बार वैक्सीन प्रोग्राम आयोजित होता है। सभार/इन्डियन आईडल

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