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इंटरनेट मीडिया से हो रहे चुनाव प्रचार में ग्रामीण भारत का एक बड़ा वर्ग अछूता

जैसा कि आपको मालूम है कि कोविड-19 की गाइडलाईन को ध्यान में रखकर चुनाव आयोग ने वर्चुअल रैली और प्रचार प्रसार के निर्देश जारी किये थे। जैसा की आपको मालूम है कि इस वक्त देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैंऔर कोरोना की वजह से न तो रैलियां हो रही हैं और न ही रोड शो के जरिये राजनीतिक दल जनता के बीच अपना शक्ति प्रदर्शन ही कर पा रहे हैं।  लिहाजा सारा चुनाव प्रचार डिजिटल प्रारूप में ही सिमट कर रह गया है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की पाबंदी के कारण राजनीतिक दल और नेता इंटरनेट मीडिया के विभिन्न मंचों के जरिये जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में लगे हैं। इन्हीं मंचों पर अपनी प्रचार सामग्री को परोसकर पार्टियां चुनाव में अपनी स्थिति को मजबूत करने में जुटी हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए इस बार राजनीतिक पार्टियां लोकगीतों के रूप में अपने अपने प्रचार गीत बनवाकर  इंटरनेट मीडिया के मंचों पर उन्हें साझा करके जनता के दिलोदिमाग पर छा जाने को बेताब हैं। इस संग्राम में आगे निकल जाने की स्पर्धा लगभग सभी दलों में दिखाई दे रही है। ऐसे में यहां यह सवाल तैर रहा है कि लोकतंत्र के इस चुनावी त्योहार में क्या यह

मदर टेरेसा द्वारा स्थापित मिशनरीज ऑफ चैरिटी के निदेशक पर FIR, युवा लड़कियों का क्रॉस पहनाकर धर्मांतरण के आरोप

 


 मदर टेरेसा द्वारा स्थापित एक संगठन मिशनरीज ऑफ चैरिटी पर गुजरात फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट, 2003 के तहत वडोदरा शहर में एक आश्रय गृह में कथित रूप से "हिंदू धार्मिक भावनाओं को आहत करने" और "ईसाई धर्म की युवा लड़कियों की ओर लालच देकर धर्मांतरण की कोशिश का मामला दर्ज किया गया है। हालांकि संगठन ने इस आरोप को खारिज कर दिया है। मकरपुरा थाने में प्राथमिकी जिला सामाजिक सुरक्षा अधिकारी मयंक त्रिवेदी की एक शिकायत पर दर्ज हुई है, जिन्होंने 9 दिसंबर को जिले की बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष के साथ मकरपुरा क्षेत्र में मिशनरीज ऑफ चैरिटी द्वारा संचालित लड़कियों के लिए गृह का दौरा किया था।प्राथमिकी में कहा गया है कि अपनी यात्रा के दौरान, त्रिवेदी ने पाया कि उन्हें ईसाई धर्म में ले जाने के इरादे से लड़कियों को ईसाई धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने और ईसाई धर्म की प्रार्थनाओं में भाग लेने के लिए "मजबूर" किया जा रहा था। 10 फरवरी 2021 से 9 दिसंबर 2021 के बीच संस्था जानबूझकर और कटुता से हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की गतिविधियों में शामिल रही है। अधिकारी ने बताया कि प्राथमिकी में कहा गया है कि प्रबंधन ने धर्म परिवर्तन के प्रयास के उद्देश्य से लड़कियों के पाठ करने के लिए स्टोररूम की मेज पर एक बाइबिल रखी थी। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। जबकि मिशनरीज ऑफ चैरिटी के प्रबंधन ने किसी भी जबरदस्ती धर्मांतरण से  इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार मिशनरीज ऑफ चैरिटी के प्रवक्ता ने कहा कि हम किसी भी धर्म परिवर्तन गतिविधि में शामिल नहीं हैं। हमारे बाल गृह में 24 लड़कियां हैं। ये लड़कियां हमारे साथ रहती हैं और वे हमारे अभ्यास का पालन करती हैं क्योंकि वे हमें ऐसा ही करते हुए देखती हैं जब हम प्रार्थना करते हैं और जीते हैं। हमने किसी का धर्म परिवर्तन नहीं किया है और न ही किसी को ईसाई धर्म में शादी करने के लिए मजबूर किया है। 

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