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इंटरनेट मीडिया से हो रहे चुनाव प्रचार में ग्रामीण भारत का एक बड़ा वर्ग अछूता

जैसा कि आपको मालूम है कि कोविड-19 की गाइडलाईन को ध्यान में रखकर चुनाव आयोग ने वर्चुअल रैली और प्रचार प्रसार के निर्देश जारी किये थे। जैसा की आपको मालूम है कि इस वक्त देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैंऔर कोरोना की वजह से न तो रैलियां हो रही हैं और न ही रोड शो के जरिये राजनीतिक दल जनता के बीच अपना शक्ति प्रदर्शन ही कर पा रहे हैं।  लिहाजा सारा चुनाव प्रचार डिजिटल प्रारूप में ही सिमट कर रह गया है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की पाबंदी के कारण राजनीतिक दल और नेता इंटरनेट मीडिया के विभिन्न मंचों के जरिये जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में लगे हैं। इन्हीं मंचों पर अपनी प्रचार सामग्री को परोसकर पार्टियां चुनाव में अपनी स्थिति को मजबूत करने में जुटी हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए इस बार राजनीतिक पार्टियां लोकगीतों के रूप में अपने अपने प्रचार गीत बनवाकर  इंटरनेट मीडिया के मंचों पर उन्हें साझा करके जनता के दिलोदिमाग पर छा जाने को बेताब हैं। इस संग्राम में आगे निकल जाने की स्पर्धा लगभग सभी दलों में दिखाई दे रही है। ऐसे में यहां यह सवाल तैर रहा है कि लोकतंत्र के इस चुनावी त्योहार में क्या यह

एन.एस.एस स्वयंसेवकों ने स्पर्श गंगा अभियान में किया प्रतिभाग


देहरादून/ दिनांक 16 दिसम्बर को राजकीय इन्टर कालेज माजरी ग्रान्ट मे एन.एस.एस स्वयंसेवकों ने स्पर्श गंगा अभियान में उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। इस मौके पर स्कूल में गंगा पर भाषण,पोस्टर और निबन्ध प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, वहीं विद्यालय परिसर में मंदिर तक स्वयंसेवकों द्वारा मार्च पास्ट करते हुये स्वच्छता से संबंधित नारे लगाये गये।वहीं स्वयंसेवकों द्वारा कूड़ा-करकट और प्लास्टिक को एकत्र किया गया और उसका निस्तारण किया गया।इस अवसर पर विद्यालय के प्रवक्ता डी.सी.नौटियाल,प्रवक्ता वी.पी.कुकरेतीप्रवक्ता श्रीमति ऊषा कुंवर,शैलेन्द्र जोशी,सरिता पंवार,वनिता पोखरियाल,धन जी रावत व एन.एस.एस कार्यक्रम अधिकारी श्रीमति पवन लता वर्मा उपस्थित थीं।


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