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पूर्व मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद सिंह रावत नहीं लड़ेंगे चुनाव

 देहरादून : बहुत बड़ी खबर निकल कर सामने आ रही है कि उत्‍तराखंड के पूर्व मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। जानकारी के मुताबिक उन्‍होंने भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर यह इच्‍छा जाहिर की है। उन्‍होंने कहा कि धामी के नेतृत्‍व में भाजपा की सरकार बनाने के लिए काम करना चाहता हूं।  जेपी नडडा को लिखे पत्र में उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर देने के लिए आभार भी व्‍य‍क्‍त किया है। साथ ही ये भी कहा है कि प्रदेश में युवा नेतृत्‍व वाली सरकार अच्‍छा काम कर रही है। उन्‍होंने कहा, बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में मुझे चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। इसलिए मेरा अनुरोध स्‍वीकार कर लिया जाए। आपको बता दें कि त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्र में लिखा कि मान्‍यवार पार्टी ने मुझे देवभूमि उत्‍तराखंड के मुख्‍यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर दिया यह मेरा परम सौभाग्‍य था। मैंने भी कोशिश की कि पवित्रता के साथ राज्‍य वासियों की एकभाव से सेवा करुं व पार्टी के संतुलित विकास की अवधारणा को पुष्‍ट करूं। प्रधानमंत्री जी का भरपूर सहयोग व आशीर्वाद मु

दिल्ली दंगा: HC का चश्मदीदों के बयान और CCTV फुटेज के आधार पर सुलेमान हत्याकांड में आरोपी को जमानत देने से इनकार

 


 दिल्ली उच्च न्यायालय ने उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगे से जुड़े एक मामले में चश्मदीद गवाहों के बयानों और सीसीटीवी फुटेज को ध्यान में रखते हुए एक आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। हाई कोर्ट ने दिल्ली दंगों के दौरान सुलेमान की हत्या करने वाली भीड़ का हिस्सा होने के आरोपी एक व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने आशीष को धारा 147 (दंगा), 148 (दंगा, घातक हथियार से लैस), 149 (गैरकानूनी सभा), 153 ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत करावल नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी संख्या 58/2020 में जमानत देने से इनकार कर दिया।बता दें अभियोजन पक्ष का यह मामला था कि मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाले सुलेमान और उसके भाई सनोबर को पीटा गया। सनोबर को गंभीर चोटें आईं, लेकिन वह अपनी जान बचाने में सफल रहा, सुलेमान को बेरहमी से पीटा गया और फिर उसे मृत समझकर नाले में फेंक दिया गया। सनोबर ने अपने बयान में कहा था कि वह सुलेमान, आदित्य, मामूर, अरसद, आरिफ, कासिम, सुनील और अन्य के साथ ठेकेदार यूसुफ के साथ काम कर रहा था और दंगों के बाद हाथों में डंडे और डंडे लिए खड़े करीब 40 लोगों ने उन्हें पकड़ लिया। उन्होंने कहा कि लोगों ने उनसे पहचान पत्र मांगा और जब उन्होंने पहचान पत्र दिखाया तो सुनील को भाग जाने को कहा। इसके बाद सुनील ने भीड़ से कहा था कि वह सनोबार और सुलेमान के साथ आया था और उनके साथ जाएगा जिसके बाद लोगों ने सनोबार और सुलेमान को पकड़ते हुए मारपीट की और धक्का दिया। जिसके बाद पिटाई की वजह से सनोबर बेहोश हो गया और बाद में उसे पता चला कि सुलेमान, जिसे उसकी मौजूदगी में पीटा भी गया था, उसकी मौत हो गई है।

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