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पूर्व मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद सिंह रावत नहीं लड़ेंगे चुनाव

 देहरादून : बहुत बड़ी खबर निकल कर सामने आ रही है कि उत्‍तराखंड के पूर्व मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। जानकारी के मुताबिक उन्‍होंने भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर यह इच्‍छा जाहिर की है। उन्‍होंने कहा कि धामी के नेतृत्‍व में भाजपा की सरकार बनाने के लिए काम करना चाहता हूं।  जेपी नडडा को लिखे पत्र में उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर देने के लिए आभार भी व्‍य‍क्‍त किया है। साथ ही ये भी कहा है कि प्रदेश में युवा नेतृत्‍व वाली सरकार अच्‍छा काम कर रही है। उन्‍होंने कहा, बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में मुझे चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। इसलिए मेरा अनुरोध स्‍वीकार कर लिया जाए। आपको बता दें कि त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्र में लिखा कि मान्‍यवार पार्टी ने मुझे देवभूमि उत्‍तराखंड के मुख्‍यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर दिया यह मेरा परम सौभाग्‍य था। मैंने भी कोशिश की कि पवित्रता के साथ राज्‍य वासियों की एकभाव से सेवा करुं व पार्टी के संतुलित विकास की अवधारणा को पुष्‍ट करूं। प्रधानमंत्री जी का भरपूर सहयोग व आशीर्वाद मु

किम जोंग उन का फरमान: कोई भी नागरिक 11 दिन तक नहीं हंसेगा , शराब पीने और शॉपिंग पर भी लगाया प्रतिबंध

 


 उत्तर कोरिया ने नागरिकों पर 11 दिन के लिए हंसने, शराब पीने और खरीदारी पर जाने का बैन लगाया है। किम जोंग-उन ने यह आदेश शुक्रवार को अपने पिता किम जोंग-इल की 10वीं पुण्यतिथि के मौके पर जारी किया। बताया गया है कि किम ने शुक्रवार से लेकर अगले 11 दिनों तक देश में राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। इसी के चलते नागरिकों की सभी फुर्सत में की जाने वाली गतिविधियों को इस अवधि के लिए रोक दिया गया है।उत्तर कोरिया के कई नागरिकों ने किम जोंग की ओर से लागू इन प्रतिबंधों की पुष्टि भी की है। रेडियो फ्री एशिया ने देश के सीमाई क्षेत्र में मौजूद सिनुइजु शहर के रहवासियों के हवाले से बताया कि आम लोग रोजमर्रा के सामान खरीदने के लिए घर से बाहर नहीं जा सकते। नियम तोड़ने वालों की गिरफ्तारी के साथ उन्हें सख्त सजा दिए जाने का भी प्रावधान है।एक नागरिक ने नाम न उजागर करने की शर्त पर कहा, "पहले भी किम जोंग-इल की पुण्यतिथि पर जो लोग शराब पीते या नशे की हालत में मिलते थे, उन्हें गिरफ्तार कर के अपराधियों की तरह रखा जाता था। कई लोगों की तो गिरफ्तारी के बाद कोई खोज खबर भी नहीं मिली।" इस नागरिक ने आगे कहा, "शोक के 11 दिन के दौरान अगर किसी की मौत भी हो जाती है, तो उसके परिवारवालों का जोर-जोर से रोने की भी इजाजत नहीं है। इसके अलावा उसके शव को तभी अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा सकता है, जब शोक के 11 दिन पूरे हो जाएं। शोक की अवधि के दौरान लोग जन्मदिन भी नहीं मना सकते।"



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