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पूर्व मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद सिंह रावत नहीं लड़ेंगे चुनाव

 देहरादून : बहुत बड़ी खबर निकल कर सामने आ रही है कि उत्‍तराखंड के पूर्व मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। जानकारी के मुताबिक उन्‍होंने भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर यह इच्‍छा जाहिर की है। उन्‍होंने कहा कि धामी के नेतृत्‍व में भाजपा की सरकार बनाने के लिए काम करना चाहता हूं।  जेपी नडडा को लिखे पत्र में उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर देने के लिए आभार भी व्‍य‍क्‍त किया है। साथ ही ये भी कहा है कि प्रदेश में युवा नेतृत्‍व वाली सरकार अच्‍छा काम कर रही है। उन्‍होंने कहा, बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में मुझे चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। इसलिए मेरा अनुरोध स्‍वीकार कर लिया जाए। आपको बता दें कि त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्र में लिखा कि मान्‍यवार पार्टी ने मुझे देवभूमि उत्‍तराखंड के मुख्‍यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर दिया यह मेरा परम सौभाग्‍य था। मैंने भी कोशिश की कि पवित्रता के साथ राज्‍य वासियों की एकभाव से सेवा करुं व पार्टी के संतुलित विकास की अवधारणा को पुष्‍ट करूं। प्रधानमंत्री जी का भरपूर सहयोग व आशीर्वाद मु

हेलीकॉप्टर क्रैश की जांच का जिम्मा एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह को

 


 देश ने एक ऐसा हादसा देखा जिसे वो वर्षों तक नहीं भूल पाएगा। इस हादसे में देश ने अपने पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत समेत कई सेनानियों को खो दिया। ये हादसा एक ऐसे हेलीकॉप्टर एमआई 17 V में हुआ जो युद्ध के मैदान में दुश्मनों की बोलती बंद कर देने में सक्षम था। ऐसे में इस हादसे ने कई सवाल छोड़ दिए हैं। क्रैश होने से पहले हेलीकॉप्टर के साथ क्या हुआ था, कोई खराबी आई थी या फिर किसी साजिश का शिकार हुआ था। इन सवालों में राजनीतिक रंगों की मिलावट भी होने लगी है। हादसे से पहले जो वीडियो सामने आया था उसने कुछ सवालों के जवाब आसान बनाए। जैसे मौसम खराब था ये साफ नजर आया जिससे विजीव्लिटी कम हो गई थी। इसके अलावा चौपर में कोई तकनीकि  खराबी आ गई इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता।पूरा मामले में ट्राइ सर्विस कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की बात कही गई है। हादसे का अहम गवाह यानी फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर भी मौजूद है जिसे आम बोलचाल की भाषा में कई बार ब्लैक बॉक्स भी कह दिया जाता है। इससे हादसे की जांच का जिम्मा एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह के पास है। एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह हेलीकॉरप्टर इंस्पेक्शन और सेफ्टी से जुड़े मुद्दों को एक्सपर्ट हैं। ये भारतीय वायुसेना के ट्रेनिंग कमांड के कमांडर हैं। वो खुद भी पायलट हैं और उन्हें 6000 घंटों से ज्यादा के उड़ान का अनुभव है। उन्होंने सियाचीन, उत्तर पूर्व भारत और उत्तराखंड जैसे इलाकों में भी उड़ान भरी है। एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह को विशिष्ट सेना मेडल वीर चक्र और विशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है। 29 दिसंबर 1982 को हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में भारतीय वायु सेना की फ्लाइंग ब्रांच में शामिल किया गया था। उन्‍होंने इसी साल एक फरवरी को भारतीय वायु सेना की दक्षिणी वायु कमान के प्रमुख का कार्यभार संभाला था। सितंबर में उन्हें एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ( ट्रेनिंग कमांड) की जिम्मेदारी दी गई। एयर मार्शल मानवेंद्र साल 2016 में एक दुर्घटना से बाल बाल बच गए थे जब वो एमआई 17 में सवार थे। ये घटना भारत के उत्तर पूर्व में घटित हुई थी। एमआई -17 हेलीकॉप्टर में सवार 16 लोग सवार थे। जो शिलांग से अरुणाचल प्रदेश के एक अग्रिम बेस के लिए उड़ान भर रहा था। इतने हाई प्रोफाइल दुर्घटना की जांच के लिए एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह पर भरोसा दिखाए जाने के पीछे की वजहों में से एक वो खुद भी एक हेलीकॉप्टर पायलट हैं। इसके साथ ही बेहद ही हार्डवर्किंग ऑफिसर भी माने जाते हैं। उनके पास विभिन्न किस्म के हेलीकॉप्टर और ट्रेनेर एयरक्रॉफ्ट उड़ाने का लंबा अनुभव रहा है। इसके साथ ही उन्होंने 6000 घंटों से भी ज्यादा वक्त तक कठिन हालातों में उड़ान भरने का अनुभव भी प्राप्त है। इनके पास एयर हेडक्वार्टर में डायरेक्टर जनरल इंस्पेक्शन एंड सेफ्टी जैसी अहम जिम्मेदारी संभालने का भी अनुभव है।  

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