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इंटरनेट मीडिया से हो रहे चुनाव प्रचार में ग्रामीण भारत का एक बड़ा वर्ग अछूता

जैसा कि आपको मालूम है कि कोविड-19 की गाइडलाईन को ध्यान में रखकर चुनाव आयोग ने वर्चुअल रैली और प्रचार प्रसार के निर्देश जारी किये थे। जैसा की आपको मालूम है कि इस वक्त देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैंऔर कोरोना की वजह से न तो रैलियां हो रही हैं और न ही रोड शो के जरिये राजनीतिक दल जनता के बीच अपना शक्ति प्रदर्शन ही कर पा रहे हैं।  लिहाजा सारा चुनाव प्रचार डिजिटल प्रारूप में ही सिमट कर रह गया है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की पाबंदी के कारण राजनीतिक दल और नेता इंटरनेट मीडिया के विभिन्न मंचों के जरिये जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में लगे हैं। इन्हीं मंचों पर अपनी प्रचार सामग्री को परोसकर पार्टियां चुनाव में अपनी स्थिति को मजबूत करने में जुटी हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए इस बार राजनीतिक पार्टियां लोकगीतों के रूप में अपने अपने प्रचार गीत बनवाकर  इंटरनेट मीडिया के मंचों पर उन्हें साझा करके जनता के दिलोदिमाग पर छा जाने को बेताब हैं। इस संग्राम में आगे निकल जाने की स्पर्धा लगभग सभी दलों में दिखाई दे रही है। ऐसे में यहां यह सवाल तैर रहा है कि लोकतंत्र के इस चुनावी त्योहार में क्या यह

देहरादून : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहुंचे सैन्यधाम , शहीदों के आंगन की मिट्टी पर अर्पित की पुष्पांजलि

 


 रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बुधवार को सैन्यधाम में शहीद परिजनों का सम्मान करेंगे। इसके लिए वह देहरादून के सैन्यधाम पहुंचे हैं। यहां पहुंचकर राजनाथ सिंह ने शहीदों के आंगन की मिट्टी पर पुष्पांजलि अर्पित की। देहरादून के 204 शहीद परिजनों को सम्मानित किया जाएगा। सैन्यधाम के शहीद द्वार का नाम सीडीएस जनरल बिपिन रावत के नाम पर रखा जाएगा।इस दौरान सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा सरहद पर खड़े रखवालों को, इस देश के पहरेदारों को मेरा सलाम है। सैन्य धाम पीएम मोदी की परिकल्पना और मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट है। देश की सेना का 17.5% पूर्ति उत्तराखंड करता है। छह माह के अंदर हमारे 60 जवान शहीद हुए हैं। हमारी सरकार ने निर्णय लिया है कि देश की सीमा पर कोई भी हमारे उत्तराखंड का जवान शहीद होगा तो हम उसके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देंगे। वहीं सैनिक विश्राम गृह और शहीद द्वार के लिए अलग बजट जारी किया गया है। वन रैंक-वन पेंशन ने पूर्व सैनिकों को सम्मान बड़ा दिया है। 63 करोड़ की लागत से जब यह सैन्य धाम बन जाएगा तो देशभर के लोग इसे देखने आएंगे। कांग्रेस को अब तक शहीदों की याद नहीं आई। अब चुनाव के समय उन्हें सैनिक और शहीद याद आ रहे हैं। भाजपा चुनाव को देखकर नहीं, बल्कि दिल से लगातार काम करती है।प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक कहा कि ने सैन्य धाम में सीडीएस जनरल बिपिन रावत के नाम पर द्वार बनाया जा रहा है। इसके लिए उन्होंने राजनाथ सिंह का आभार जताया।कार्यक्रम में सीएम पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट, विस अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, भाजपा अध्यक्ष मदन कौशिक, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत और टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह भी मौजूद रहीं। सैन्यधाम के रूप में उत्तराखंड का पांचवां धाम विकसित किया जा रहा है। जिसमें प्रदेश के शहीदों की यादों को संजोकर रखा जाएगा। सैन्यधाम के लिए 1734 शहीदों के आंगन की मिट्टी को लाया गया है। जिसे अमर जवान ज्योति की बुनियाद में लगाया जाएगा। 63 करोड़ की लागत से बनने वाले सैन्यधाम में शहीद जसवंत सिंह और हरभजन सिंह के मंदिर बनाए जाएंगे।धाम में अमर जवान ज्योति, म्यूजियम, थियेटर, गन, टैंक प्रमुख आकर्षण का केंद्र होंगे। 15 नवंबर 2021 को चमोली के स्वाड गांव से शहीद सम्मान यात्रा शुरू की गई थी। जिसका गुनियाल गांव में आज बुधवार को समापन होगा। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट और सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस यात्रा का शुभारंभ किया था।शहीद सम्मान यात्रा के जरिये 95 ब्लॉकों के 1734 शहीद परिवारों से संपर्क कर उनके आंगन की मिट्टी को पवित्र कलश में यहां लाया गया है। 50 बीघा में बनने वाला धाम दो साल के भीतर बनकर तैयार हो जाएगा। यहां भी अखंड ज्योति प्रज्वलत रहेगी।सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि सैन्यधाम के लिए रास्ते के मामले को सुलझा लिया गया है। करीब चार सौ मीटर तक अन्य लोगों को भी रास्ते पर अधिकार दिया जाएगा। जबकि इसके आगे का रास्ता सैन्यधाम का निजी रास्ता होगा। मंत्री ने कहा कि रास्ते में अन्य लोगों की साढ़े आठ बीघा जमीन आ रही है। इसके बदले उन्हें दूसरी जगह जमीन दी जाएगी। इसके लिए उन लोगों की सहमति ले ली गई है।



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