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नए वेरिएंट फैलने की आशंका : आश्रमों और गेस्ट हाउस में भी देना होगा अब कोरोना जांच का प्रमाणपत्र

  मथुरा / उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में वृन्दावन शहर में दस विदेशी एवं एक देशी नागरिक के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी गेस्ट हाउसों एवं आश्रमों को कहा है कि वे अपने आने वाले हर देशी-विदेशी मेहमान का पूरा ब्योरा रखें और उनके पास कोरोना जांच का नेगेटिव प्रमाण पत्र होने के बाद ही उन्हें अपने यहां ठहराएं। गौरतलब है कि लंबे समय तक कोरोना वायरस का मामला नहीं आने के बाद बरती गई लापरवाही के बाद अब फिर से कोरोना संक्रमितों के मिलने का सिलसिला चल पड़ा है। वृन्दावन में पिछले सप्ताह से अब तक दस विदेशी एवं एक उड़ीसा की भारतीय नागरिक संक्रमित पाई जा चुकी है। तीन विदेशी जिला स्तर पर कोई सूचना दिए बिना यहां से लौट भी चुके हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रचना गुप्ता ने कहा है कि गेस्ट हाउस एवं आश्रम बाहर से आने वाले व्यक्तियों के रुकने से पूर्व उनके कोविड वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र एवं कोविड-19 जांच रिपोर्ट प्राप्त कर ही उन्हें ठहराएं तथा ऐसा नहीं होने पर वे तत्काल स्वास्थ्य विभाग के नियंत्रण कक्ष को रिपोर्ट करें। उनके अनुसार नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। न

शिवसेना का तंज : बैल कितना भी अड़ियल हो, किसान खेत जुतवा ही लेता है-संजय राउत

 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि कानून वापस लेने का ऐलान किया। तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के बाद शिवसेना की तरफ से मोदी सरकार पर तंज कसा गया है। शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बैल और किसानों का उदाहरण देते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया है। संजय राउत ने ट्विट करते हुए लिखा कि 'बैल कितना भी अड़ियल क्यों ना हो, किसान खेत जुतवा ही लेता है, जय जवान, जय किसान!' बता दें कि अपने बयानों से सुर्खियां बटोरने वाले शिवसेना नेता राउत इससे पहले भी सरकार के फैसले पर व्यग्यात्मक अंदाज में चुटकी ले चुके हैं। राउत ने ट्विटर पर एक ट्विट को रिट्विट किया है जिसमें वो किसान नेता राकेश टिकैत के साथ नजर आ रहे हैं। साथ में कैप्शन लिखा है- ट्रॅक्टर और जेसीबी का साथ काला कृषी कानुन बिल हुआ साफ।इससे पहले भी संजय राउत ने मोदी सरकार के फैसले पर टिप्पणी करते हुए  इसे किसानों के संघर्ष और एकता की जीत बताया था।  उन्होंने कहा था कि ये फैसला एक साल पहले होना चाहिए था। जिससे कई किसानों की जान बच जाती। पूरा देश चाहता था कि किसानों केसाथ सीधी बात हो। लेकिन सरकार अहंकार की भावना लिए अड़ी रही। उस अहंकार को भी किसानों की एकता ने चांटा मारा है। ये एक राजनीतिक फैसला है। कई राज्यों के उपचुनाव में हार की वजह से ये फैसला लिया गया है। 

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