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इंटरनेट मीडिया से हो रहे चुनाव प्रचार में ग्रामीण भारत का एक बड़ा वर्ग अछूता

जैसा कि आपको मालूम है कि कोविड-19 की गाइडलाईन को ध्यान में रखकर चुनाव आयोग ने वर्चुअल रैली और प्रचार प्रसार के निर्देश जारी किये थे। जैसा की आपको मालूम है कि इस वक्त देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैंऔर कोरोना की वजह से न तो रैलियां हो रही हैं और न ही रोड शो के जरिये राजनीतिक दल जनता के बीच अपना शक्ति प्रदर्शन ही कर पा रहे हैं।  लिहाजा सारा चुनाव प्रचार डिजिटल प्रारूप में ही सिमट कर रह गया है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की पाबंदी के कारण राजनीतिक दल और नेता इंटरनेट मीडिया के विभिन्न मंचों के जरिये जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में लगे हैं। इन्हीं मंचों पर अपनी प्रचार सामग्री को परोसकर पार्टियां चुनाव में अपनी स्थिति को मजबूत करने में जुटी हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए इस बार राजनीतिक पार्टियां लोकगीतों के रूप में अपने अपने प्रचार गीत बनवाकर  इंटरनेट मीडिया के मंचों पर उन्हें साझा करके जनता के दिलोदिमाग पर छा जाने को बेताब हैं। इस संग्राम में आगे निकल जाने की स्पर्धा लगभग सभी दलों में दिखाई दे रही है। ऐसे में यहां यह सवाल तैर रहा है कि लोकतंत्र के इस चुनावी त्योहार में क्या यह

हरिद्वार धर्म संसद : भीम आर्मी का कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन,वसीम रिजवी की गिरफ्तारी की मांग




हरिद्वार : धर्म संसद मामले के बाद अब भीम आर्मी भी  धर्म संसद में दिये गये भड़काऊ भाषण के खिलाफ सड़कों पर उतर आई है। इसी को लेकर भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने रोशनाबाद कलेक्ट्रेट ऑफिस पर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने जितेन्द्र नरायण सिंह उर्फ वसीम रिजवी की गिरफ्तारी की मांग की। भीम आर्मी के कार्यकर्ता भारी संख्या में प्रदर्शन के लिए पहुंचे। हरिद्वार धर्म संसद में भड़काऊ बयान मामले में ज्वालापुर पुलिस ने दूसरी एफआईआर दर्ज की है, जिसमें यति नरसिम्हानंद गिरि समेत 10 लोगों के नाम हैं। 16-19 दिसंबर तक चली धर्म संसद में मुस्लिमों के खिलाफ घृणा फैलाने वाले भाषण दिये जाने को लेकर नदीम अली की शिकायत पर पुलिस ने यह कार्रवाई की।  पुलिस की प्राथमिकी में आयोजक यति नरसिम्हानंद गिरि, जितेंद्र नारायण त्यागी, सिंधु सागर, धर्मदास, परमानंद, साध्वी अन्नपूर्णा, आनंद स्वरूप, अश्विनी उपाध्याय, सुरेश चह्वाण और प्रबोधानंद गिरि के नाम हैं। रविवार को दर्ज एफआईआर को ज्वालापुर थाने से शहर के थाने में स्थानांतरित कर दिया गया था इस मामले की पहली एफआईआर दर्ज है। वहीं मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन भी हुआ। विधानसभा चुनाव के बीच इस धर्म संसद को लेकर प्रदेश में भाजपा पर काफी दबाव है।धर्म संसद मामले के बाद फोन न उठाए जाने के मामले में डीजीपी ने एसएसपी हरिद्वार से स्पष्टीकरण मांगा है। बताया जा रहा है कि इस मामले के बाद एसएसपी मीडिया कर्मियों के फोन कॉल तक रिसीव नहीं कर रहे हैं। इस तरह का यह पहला मामला है जब डीजीपी ने किसी जिले के कप्तान से जवाब तलब किया है।  आपको बता दें कि पिछले महीने से मामला तूल पकड़ता जा रहा है। यह मामला मीडिया की सुर्खियां बना हुआ है। हरिद्वार में दो मुकदमे भी दर्ज हो चुके हैं। ऐसे में एसएसपी से भी तमाम तरह की बातें व बयान लेने के लिए मीडिया कर्मी संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन एसएसपी किसी का भी फोन नहीं उठा रहे हैं। ऐसे में मुख्यालय को इसमें लगातार हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक डीजीपी अशोक कुमार ने कप्तान हरिद्वार को पत्र भेजकर स्पष्टीकरण के साथ ही हिदायत दी है कि वह इस तरह का व्यवहार न करें। जो बयान मीडिया में आने लायक हैं उन्हें स्पष्ट बता दिया जाना चाहिए। हालांकि विवेचना के बिंदुओं को सार्वजनिक न किया जाए। डीजीपी अशोक कुमार ने भी स्पष्टीकरण मांगे जाने की पुष्टि की। 


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