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हरक की घर वापसी, बहू अनुकृति ने भी थामा कांग्रेस का हाथ

देहरादून: पांच दिनों तक मचे सियासी घमासान के बाद आखिरकार पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत और उनकी बहू अनुकृति गुसाईं ने आज दिल्‍ली में कांग्रेस का दामन थाम लिया।  इस दौरान पूर्व मुख्‍यमंत्री हरीश रावत समेत कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे। इस दौरान हरक सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश का विकास मेरा लक्ष्‍य है। उन्होंने कहा कि मैं बिना शर्त कांग्रेस परिवार में शामिल हुआ हूं।हरक ने कहा मैंने 20 साल तक कांग्रेस के लिए काम किया है। मैं सोनिया गांधी का एहसान किसी भी कीमत पर नहीं भूलूंगा । वहीं देर आयद दुरूस्त आये की कहावत चरितार्थ करते हुये कांग्रेस में पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत की वापसी पर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस की प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत की आपत्ति के बाद पेच फंसा हुआ था । हालांकि सरकार तोडने में हरक की भूमिका जिसमे उन्होंने वर्ष 2016 में बगावत कर उनकी सरकार गिराई भी हरीश रावत बहुत नाराज थे जिसको लेकर हरीश रावत के तीखे तेवरों में अभी कमी नहीं आई है। वह हरक सिंह रावत को लोकतंत्र का गुनहगार बताते हुए पहले माफी मांगने पर जोर देते रहे। लेकिन हरीश रावत कह चुके थे कि हरक की

मध्य प्रदेश में टाईगर हंट की सबसे ज्यादा घटनाऐं, इस साल 41 बाघों की हुई मौत

 


भोपाल /  मध्य प्रदेश में टाइगर हंट की घटनाएं लगातार सामने आ रही है। सोमवार सुबह शाहपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत डिंडौरी के सरसताल पंचायत में एक बाघ मृत अवस्था में पाया गया है। बाघ को करंट लगाकर मारा गया है। इसके साथ मध्य प्रदेश में इस साल 41 बाघों की मौत हो चुकी है।दरअसल  सोमवार सुबह ग्रामीणों ने मृत बाघ को देखा जिसके बाद वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही डीएफओ साहिल गर्ग सहित वन विभाग का अमला भी मौके में पहुंचा।जिसके बाद डीएफओ ने कहा कि बाघ कब और कैसे यहां आया अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। वन विभाग के मुताबिक बाघ के शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं हैं ऐसे में मौत के कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।वहीं इस मुद्दे पर वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे ने टाइगर की मौत के लिए पूरी तरह से वन विभाग को जिम्मेदार बताया है। अजय दुबे ने कहा कि बीते कुछ सालों से मध्य प्रदेश में सर्वाधिक बाघों की मौत हो रही है। ऐसा लगता है वन विभाग को कोई चिंता ही नहीं है। आप ये जानकर हैरान होंगे कि मध्य प्रदेश में पिछले पांच वर्षों में टाइगर सेल की एक भी बैठक नहीं हुई है। एमपी न तो ढंग से सुपरविजन होता है, न पैट्रोलिंग होती है, और न ही इंटेलिजेंस नेटवर्क है।आपको बता दें कि पिछले हफ्ते विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक नारायण सिंह पट्टा ने बाघों की मौत को लेकर सवाल उठाया था। इसके लिखित जवाब में वनमंत्री विजय शाह  जवाब दिया।उन्होंने कहा कि इस साल जनवरी से लेकर 7 सितंबर तक 41 बाघों के मौत की पुष्टि हुई इनमें से 11 बाघों का शिकार हुआ है। पिछले साल को लेकर वनमंत्री ने बताया कि 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2020 तक 30 बाघों की मौत हुई, जिनमें 9 मामले शिकार के हैं और 21 स्वाभाविक मौत हैं।

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