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पूर्व मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद सिंह रावत नहीं लड़ेंगे चुनाव

 देहरादून : बहुत बड़ी खबर निकल कर सामने आ रही है कि उत्‍तराखंड के पूर्व मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। जानकारी के मुताबिक उन्‍होंने भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर यह इच्‍छा जाहिर की है। उन्‍होंने कहा कि धामी के नेतृत्‍व में भाजपा की सरकार बनाने के लिए काम करना चाहता हूं।  जेपी नडडा को लिखे पत्र में उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर देने के लिए आभार भी व्‍य‍क्‍त किया है। साथ ही ये भी कहा है कि प्रदेश में युवा नेतृत्‍व वाली सरकार अच्‍छा काम कर रही है। उन्‍होंने कहा, बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में मुझे चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। इसलिए मेरा अनुरोध स्‍वीकार कर लिया जाए। आपको बता दें कि त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्र में लिखा कि मान्‍यवार पार्टी ने मुझे देवभूमि उत्‍तराखंड के मुख्‍यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर दिया यह मेरा परम सौभाग्‍य था। मैंने भी कोशिश की कि पवित्रता के साथ राज्‍य वासियों की एकभाव से सेवा करुं व पार्टी के संतुलित विकास की अवधारणा को पुष्‍ट करूं। प्रधानमंत्री जी का भरपूर सहयोग व आशीर्वाद मु

किरायेदारी अधिनियम 2021 उत्तराखंड विस में हुआ पास

 


 प्रदेश में मकान मालिक अब अपनी मर्जी से मनमाना किराया नहीं बढ़ा सकेंगे। वहीं, किराए की अवधि पूरी होने के बाद नियमानुसार किरायेदार को मकान खाली करना होगा। मकान मालिक और किरायेदारों के बीच के झगड़े खत्म करने के लिए उत्तराखंड किरायेदारी अधिनियम 2021 पास हो गया है। जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी हो जाएगी।दरअसल, मकान मालिक और किरायेदारों के बीच के झगड़े आम हैं। कहीं मकान मालिक का बीच में ही किराया बढ़ोतरी करना विवाद का कारण बनता है तो कहीं किराएदार का अवधि पूरी होने के बाद भी मकान खाली न करना।केंद्रीय आदर्श किरायेदारी अधिनियम 2021 की तर्ज पर उत्तराखंड में किरायेदारी अधिनियम 2021 विधानसभा से पास हो गया है। इस कानून के अस्तित्व में आने के बाद आपसी झगड़े खत्म हो जाएंगे। वहीं किरायेदार और मकान मालिकों के हित भी सुरक्षित हो जाएंगे।मकान मालिक व किरायेदार के बीच लिखित रूप से अनुबंध होगा और सहमति से ही किराया तय किया जाएगा। अधिनियम के हिसाब से मकान की पुताई से लेकर बिजली की वायरिंग, स्विच बोर्ड, पानी का नल ठीक करने आदि के लिए अलग-अलग जिम्मेदारी तय की जाएगी।इससे मकान मालिक व किरायेदार के बीच किसी तरह का विवाद नहीं रहेगा। इस कानून के लागू होने के बाद अब मकान मालिक अपनी मर्जी से किराया नहीं बढ़ा सकेंगे। किराये से संबंधित विवाद व शिकायतें सिविल न्यायालय में दायर नहीं होंगे। इसे मामलों की किराया प्राधिकरण व न्यायालय में सुनवाई की जाएगी।उत्तराखंड किरायेदारी अधिनियम 2021 में न केवल आवासीय भवन बल्कि व्यावसायिक भवन में शामिल होंगे। अब किराया बाजार को बढ़ावा मिलेगा। जो जितना अधिक किराया लेगा, उसी हिसाब से सुविधाएं भी देगा। माना जा रहा है कि इस अधिनियम के लागू होने के बाद सबकी राह आसान होगी।



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