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त्रिपुरा हिंसा : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्‍य सरकार को दो हफ्ते के भीतर जवाब देने के दिए निर्देश

    नई दिल्‍ली /   सुप्रीम कोर्ट त्रिपुरा में हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामले में राज्य पुलिस की कथित मिली-भगत और निष्क्रियता के आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सोमवार को केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति डीवाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने सरकारों को दो हफ्ते के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है।  अधिवक्ता ई. हाशमी की ओर से दाखिल याचिका पर अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पैरवी की। उन्‍होंने सर्वोच्‍च अदालत से कहा कि वे हालिया साम्प्रदायिक दंगों की स्वतंत्र जांच चाहते हैं। इस मामले में अब दो हफ्ते बाद सुनवाई होगी। भूषण ने कहा कि सर्वोच्‍च अदालत के समक्ष त्रिपुरा के कई मामले लंबित हैं। पत्रकारों पर यूएपीए के आरोप लगाए गए हैं। यही नहीं कुछ वकीलों को नोटिस भेजा गया है। पुलिस ने हिंसा के मामले में कोई एफआइआर दर्ज नहीं की है। ऐसे में अदालत की निगरानी में इसकी जांच एक स्वतंत्र समिति से कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की प्रति केंद्रीय एजेंसी और

राकेश टिकैत का ऐलान, संसद तक 60 ट्रैक्टर और 1 हजार लोगों के साथ जाएंगे किसान

 


 पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से तीन नए कृषि कानूनों की वापसी के ऐलान के बाद भी किसान संगठन आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं। इस बीच किसान नेता राकेश टिकैत ने संसद के शीत सत्र के पहले दिन ट्रैक्टर रैली निकालने का ऐलान किया है। भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि 29 नवंबर को शीत सत्र के पहले दिन 1000 लोग 60 ट्रैक्टर लेकर संसद की ओर कूच करेंगे।

 राकेश टिकैत ने एएनआई से कहा, 'जो सड़के सरकार द्वारा खोली गई हैं। उन सड़कों से ट्रैक्टर गुजरेंगे। हम पर पहले सड़कों को ब्लॉक करने का आरोप लगाया गया था। हमने सड़क को अवरुद्ध नहीं किया था। सड़कों को ब्लॉक करना करना हमारे आंदोलन का हिस्सा नहीं है। हमारा आंदोलन सरकार से बात करना है। हम सीधे संसद जाएंगे।'राकेश टिकैत का बयान ऐसे समय में आया है, जब केंद्रीय कैबिनेट की बुधवार को ही मीटिंग होने वाली है, जिसमें कृषि कानूनों की वापसी के लिए बिल पेश करने पर मुहर लगेगी।

 इसे संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत में ही पेश किया जा सकता है। टिकैत ने यह भी घोषणा की कि अन्य मुद्दों के अलावा एमएसपी कानून के लिए दबाव बनाने के लिए कम से कम एक हजार लोग संसद जाएंगे।भारतीय किसान यूनियन के नेता ने एएनआई से कहा, 'हम एमएसपी को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा, पिछले एक साल में हुई घटनाएं, जिसमें 750 किसान मारे गए, सरकार को इसकी जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।' एसकेएम ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय किसान संगठनों द्वारा भी दुनिया भर में "एकजुटता कार्यक्रमों" की  योजना बनाई जा रही है। संसद का शीतकालीन सत्र 29 नवंबर से शुरू होगा और इसके 23 दिसंबर तक चलने की उम्मीद है।

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