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नए वेरिएंट फैलने की आशंका : आश्रमों और गेस्ट हाउस में भी देना होगा अब कोरोना जांच का प्रमाणपत्र

  मथुरा / उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में वृन्दावन शहर में दस विदेशी एवं एक देशी नागरिक के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी गेस्ट हाउसों एवं आश्रमों को कहा है कि वे अपने आने वाले हर देशी-विदेशी मेहमान का पूरा ब्योरा रखें और उनके पास कोरोना जांच का नेगेटिव प्रमाण पत्र होने के बाद ही उन्हें अपने यहां ठहराएं। गौरतलब है कि लंबे समय तक कोरोना वायरस का मामला नहीं आने के बाद बरती गई लापरवाही के बाद अब फिर से कोरोना संक्रमितों के मिलने का सिलसिला चल पड़ा है। वृन्दावन में पिछले सप्ताह से अब तक दस विदेशी एवं एक उड़ीसा की भारतीय नागरिक संक्रमित पाई जा चुकी है। तीन विदेशी जिला स्तर पर कोई सूचना दिए बिना यहां से लौट भी चुके हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रचना गुप्ता ने कहा है कि गेस्ट हाउस एवं आश्रम बाहर से आने वाले व्यक्तियों के रुकने से पूर्व उनके कोविड वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र एवं कोविड-19 जांच रिपोर्ट प्राप्त कर ही उन्हें ठहराएं तथा ऐसा नहीं होने पर वे तत्काल स्वास्थ्य विभाग के नियंत्रण कक्ष को रिपोर्ट करें। उनके अनुसार नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। न

उत्तराखंड: चुनावी महा संग्राम 2022 में किसानों के मुद्दे पर भी सियासी जंग के आसार,कुछ सीटों पर पड़ सकता है असर

 


किसानों के मुद्दे के बहाने विपक्ष प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा के दबदबे वाले जिलों में सेंध लगाने के मंसूबे पाले हुए है। तीनों चर्चित कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के बावजूद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी किसान आंदोलन की अतीत की घटनाओं के बहाने भाजपा को असहज करने की कोशिश करेंगी। इधर, भाजपा भी पलटवार करने को तैयार है।प्रदेश की करीब दो दर्जन विधानसभा सीटों पर किसान मतदाताओं का असर है। 2017 में भाजपा को सत्ता पर काबिज कराने में तीन मैदानी जिलों की अहम भूमिका रही है। यही तीनों जिले किसान आंदोलन से प्रभावित रहे हैं। पर्वतीय जिलों में किसान आंदोलन का कोई प्रभाव नहीं रहा। बेशक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानूनों को वापस लेने का एलान कर दिया है। लेकिन अभी किसानों के मुद्दे पर सियासत खत्म नहीं हुई है।विधानसभा चुनाव को देखते हुए किसानों के मसलों की सियासत के और ज्यादा गरमाने के आसार हैं। गन्ना समर्थन मूल्य बढ़ाने से लेकर अन्य मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेरने के अभियान में जुट गया है। कांग्रेस और आप के नेताओं ने तराई क्षेत्र में दौरे करने शुरू कर दिए हैं। इधर, भाजपा ने भी पलटवार की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के मुताबिक, भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार ने किसानों के हित कई अहम फैसले लिए। पार्टी कार्यकर्ता इन फैसलों को लेकर मतदाताओं के बीच जाएंगे। 


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तीन मैदानी जिलों में किसानों की संख्या

जनपद  -   किसानों की संख्या   

देहरादून      -     60373

हरिद्वार       -     87950

ऊधमसिंहनगर  -  94677

नैनीताल   -       101221

कुल योग    -      3,44,221


देहरादून जिले में 10 विधानसभा सीटें हैं। इनमें से तीन विधानसभा सीटों पर किसानों का प्रभाव हैं। इनमें डोईवाला, विकासनगर और सहसपुर चुनाव क्षेत्र हैं। तीनों सीटों पर भाजपा का कब्जा है।हरिद्वार जिले की 11 विधानसभा सीटों में 10 सीटों पर किसान बड़ा फेक्टर माने जाते हैं। जिले के पश्चिमी यूपी से सटे विधानसभा क्षेत्रों में किसान आंदोलन का प्रभाव साफ देखा गया। पूरे जिले के किसान आंदोलन के दौरान काफी सक्रिय दिखे। 10 में से सात सीटें भाजपा के पास हैं।ऊधमसिंहनगर जिले की सभी नौ सीटों पर किसानों का प्रभाव है। इनमें केवल एक जसपुर विस सीट कांग्रेस के पास है। बाकी आठ सीटों पर भाजपा का कब्जा है। यहां तराई की कुछ सीटों पर किसानों का खासा दखल है। किसान आंदोलन का पूरे जिले पर काफी असर दिखा। कृषि कानूनों की वापसी के एलान से सत्तारूढ़ भाजपा को यहां काफी राहत मिली।



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