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अखिलेश यादव-राजभर की जोड़ी का ऐलान,बंगाल में खेला होबे के बाद अब यूपी में खदेड़ा होबे

      सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने अपनी पार्टी के 19वें स्थापना दिवस के अवसर पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को अपने मंच पर बुलाकर आगामी विधानसभा चुनाव में छोटे बड़े दलों के गठबंधन को मंच मुहैया कराने की कोशिश की है। ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि वह भावी सीएम को आपने सामने लेकर आए हैं।  उन्होंने कहा कि वह समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। अखिलेश यादव के साथ रैली में ओपी राजभर ने कहा कि बंगाल में 'खेला होबे' हुआ था तो यूपी में 'खदेड़ा होबे'। राजभर ने कहा कि 2022 में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनेंगे। सरकार बनी तो घरेलू बिजली का बिल 5 साल तक माफ किया जाएगा। अखिलेश यादव ने कहा कि सपना दिखाया की चप्पल पहनने वाला हवाई जहाज में चलेगा, आज महंगाई के कारण चप्पल पहनने वाले व्यक्ति की मोटरसाइकिल भी चल नहीं पा रही है।  आज पेट्रोल की कीमत क्या है? क्या हालत कर दी जनता की। अखिलेश यादव जी ने कहा जब कोरोना जैसी महामारी आई तब सरकार ने बेसहारा छोड़ दिया सरकार ने मदद नहीं की। इससे पहले ओपी राजभर ने कहा कि यूपी के लोग बीजेपी क

कोर्टने कहा फ़्रांस जलवायु परिवर्तन निष्क्रियता का दोषी,देनाहोगा मुआवज़ा

Climate कहानी बुधवार को अपने एक ऐतिहासिक फैसले में, पेरिस की प्रशासनिक अदालत ने फ़्रांस में जलवायु परिवर्तन से हो रही पारिस्थितिक क्षति को माना और फ्रांस का ग्रीनहाउस गैसों को कम करने के लक्ष्यों को पूरा करने में नाकामयाब होने का जिम्मेदार ठहराते हुए मुआवज़ा देने का आदेश दिया। मामला है दो मिलियन नागरिकों द्वारा समर्थित गैर सरकारी संगठनों के एक समूह का जिसने फ्रांसीसी सरकार पर जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए क़दम उठाने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए एक शिकायत दर्ज की थी, जिसे "केस ऑफ़ द सेंचुरी" करार दिया गया है। अदालत ने राज्य को मुआवज़े के रूप में 1 यूरो की प्रतीकात्मक रकम का भुगतान करने का आदेश भी दिया। फ्रांस अपने लक्ष्यों को पूरा नहीं कर रहा है फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों जलवायु परिवर्तन कार्रवाई के लिए अपने समर्थन के बारे में बहुत मुखर रहे हैं। उन्होंने दिसंबर में, 1990 के स्तर की तुलना में कम से कम 55% तक ग्रीनहाउस गैसों को कम करने के लिए, यूरोपीय संघ के 2030 के लक्ष्यों को मजबूत करने के लिए धक्का दिया था - पिछले 40% के लक्ष्य से बढ़ाकर। लेकिन ऑक्सफेम फ्रांस, ग्रीनपीस फ्रांस और दो अन्य संगठनों का कहना है कि वैश्विक जलवायु कार्रवाई के लिए मैक्रों की पैरवी ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार उत्सर्जन पर नियंत्रण लगाने के लिए पर्याप्त घरेलू उपायों द्वारा समर्थित नहीं है। वे नोट करते हैं कि फ्रांस 2015 के पेरिस समझौते के तहत निर्धारित अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों से चूक रहा है, और देश ने 2020 तक अपने अधिकांश प्रयासों में देरी की है। जो चार गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) मामले को अदालत तक लाए, उनहोंने बुधवार के अदालत के फैसले को "जलवायु के लिए पहली ऐतिहासिक जीत" और "सच्चाई की जीत" कहा, यह भी कहते हुए कि अब तक फ्रांस "अपनी जलवायु नीतियों की अपर्याप्तता" से इनकार करता रहा है। पेरिस की अदालत ने समस्या को सुधारने और चीजों को खराब होने से रोकने के उपायों पर निर्णय लेने के लिए खुद को दो महीने का समय दिया। अदालत ने तय किया कि इस मामले में पैसे देना उचित नहीं होगा और यह जोड़ा कि हानिपूर्ति को ग्रीनहाउस गैसों को कम करने के लक्ष्यों को पूरा करने में विफलता को ठीक करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। दो साल पहले, चार संगठनों (नोट्रे अफेयर ए टूस, फाउनडेशन निकोलस हुलोट, ग्रीनपीस फ्रांस और ऑक्सफैम फ्रांस) ने "द केस ऑफ़ द सेंचुरी" ("सदी का मामला") शुरू किया, जो जलवायु निष्क्रियता के लिए फ्रांसीसी राज्य के खिलाफ एक कानूनी कार्रवाई है। यह इस लिए दर्ज किया गया क्योंकि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए फ्रांस अपने अंतर्राष्ट्रीय, यूरोपीय और फ्रांसीसी दायित्वों का पालन नहीं करता है। यह मामला 2.3 मिलियन नागरिकों द्वारा समर्थित है, जिन्होंने इस मामले की शक्ल में अब तक की सबसे बड़ी फ्रांसीसी ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर किए। द केस ऑफ़ द सेंचुरी" ("सदी का मामला") राज्य की जिम्मेदारी को पहचानने और राज्य को जलवायु नीतियों के बारे में अपनी सभी कमियों को समाप्त करने और अपने लक्ष्यों और प्रतिबद्धताओं को पूरा करने का निर्देश देने के लिए न्यायाधीश (जज) के हस्तक्षेप की मांग कर रहा है। राज्य विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिबद्धताओं और लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहा है - जिसे बड़े पैमाने पर प्रलेखित किया गया है - जिसमें जलवायु परिवर्तन पर फ्रांस की उच्च परिषद (स्वतंत्र निकाय) शामिल है: § 2015-2019 की अवधि में कार्बन बजट लगभग 4% से अधिक हो गया। § रिन्यूएबल ऊर्जा: 2020 के लिए लक्ष्य 23% है लेकिन एक बड़ी क्षमता के बावजूद फ्रांस 2019 में केवल 17.2% तक पहुंचता है। यूरोपीय संघ में सबसे खराब प्रदर्शन करने वालों में से एक। § भवनों का ऊर्जा नवीकरण: प्रति वर्ष 0.2% की दर - 2022 के बाद 1% प्रति वर्ष और 2030 तक प्रति वर्ष 1.9% तक पहुंचने के लिए तेजी से बढ़ना चाहिए § परिवहन: 2017 में 10% गैर-सड़क, गैर-हवाई भाड़ा बनाम 2022 में 25% के लक्ष्य के § कृषि: आर्गेनिक में प्रयोग करने योग्य कृषि क्षेत्र का 8% बनाम 2020 के 20% के उद्देश्य के / उद्देश्य का संशोधित और 2022 में केवल 15% तक पहुंचने के लिए कम किया गया। आर्गेनिक किसानों को सहायता के भुगतान में 3 साल की देरी। कानूनी कार्रवाई कई कानूनी ग्रंथों पर आधारित है, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दायित्व को लागू करने वाले "कानून के सामान्य सिद्धांत" के अस्तित्व को पहचानना संभव बनाते है: § 2004 में अपनाया गया फ्रांसीसी पर्यावरण चार्टर, जिसका संवैधानिक मूल्य है § मानवाधिकारों का यूरोपीय सम्मेलन और यूरोपीय न्यायालय मानवाधिकारों का न्यायशास्त्र § यूरोपीय निर्देश (ऊर्जा-जलवायु पैकेज) § घरेलू कानून (ग्रेनेल्ल कानून, पारिस्थितिक संक्रमण और ग्रीन ग्रोथ और अन्य पर कानून) और ग्रंथ (कम कार्बन राष्ट्रीय रणनीति (एसएनबीसी)(SNBC)) यह स्वीकार करना कि राज्य की गलती से पारिस्थितिक क्षति हुई फ्रांसीसी न्याय में पहली बार हुआ है: अब तक, यह केवल न्यायिक न्यायाधीश के सामने, यानी निजी और व्यक्तिगत संस्थाओं के खिलाफ ही लागू किया जा सकता था। पूरी दुनिया में, नागरिक एक रहने में सक्षम जलवायु के अपने मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। नीदरलैंड में, अदालतों ने राज्य को अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के नाम पर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए उच्च लक्ष्य निर्धारित करने का आदेश दिया है। जल्द ही यह फ्रांस की बारी हो सकती है। यह मामला दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ सरकारों के विरुद्ध बढ़ते आन्दोलनों और जलवायु प्रचारकों के बढ़ते प्रयासों का हिस्सा है। दरअसल पांच साल पहले पेरिस में हस्ताक्षरित एक अंतर्राष्ट्रीय समझौते का उद्देश्य ग्लोबल वार्मिंग को पूर्व-औद्योगिक स्तरों के ऊपर 2 डिग्री सेल्सियस से कम, और अधिमानतः 1.5 डिग्री तक सीमित करना है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारें अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने से बहुत दूर हैं, और निष्क्रियता को लेकर युवा पीढ़ी में गुस्सा बढ़ रहा है जो स्वीडिश किशोरी ग्रेटा थनबर्ग के अभियानों द्वारा प्रतिनिधित्व है। -- Sources: Climateकहानी

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