शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी व 4 अन्य के खिलाफ सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर


लखनऊ/ आखिरकार शिया वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की अवैध खरीद-बिक्री व ट्रांसफर मामलों की सीबीआई जांच अब विधिवत रूप से शुरू हो गई है। शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी सहित कई लोगों के खिलाफ सीबीआई की लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने आईपीसी की धारा 409, 420 और 506 के तहत एफआईआर दर्ज की है। इसमें वसीम रिजवी के अलावा शिया वक्फ बोर्ड के प्रशासनिक अधिकारी गुलाम सैयदन रिजवी और वक्फ इंस्पेक्टर वाकर रजा, नरेश कृष्ण सोमानी और विजय कृष्ण सोमानी को नामजद किया गया है। प्रयागराज के मामले में वसीम रिजवी अकेले नामजद हैं।


प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने सीबीआई जांच और मामले में मुकदमा दर्ज किए जाने का स्वागत करते हुए कहा है कि तमाम मुस्लिम धर्मगुरु काफी समय से इसकी मांग कर रहे थे। उन्होने आरोप लगाया कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की खरीद-बिक्री में हजारों करोड़ का घोटाला किया गया है। मोहसिन रजा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं वसीम रिजवी ने इस मामले पर कहा कि वे सीबीआई जांच का स्वागत करते हैं परन्तु ये सब कुछ कट्टरपंथी मुल्लाओं के दबाव में किया गया है। उन्होने एक न्यूज चैनल पर आज फिर शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जव्वाद पर ही सवाल उठाते हुए उन्हे ईरानी एजेंट बताया।


बताते चलें कि पिछले काफी समय से वसीम रिजवी पर वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की खरीद और बिक्री में धोखाधड़ी का आरोप लग रहा था। इस मामले में मौलाना कल्बे जव्वाद एवं मंत्री मोहसिन रजा वह अन्य सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने प्रयागराज व कानपुर में वक्फ संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी और गड़बड़ी के मामले में वसीम रिजवी व अन्य के खिलाफ 2 एफआईआर दर्ज कीं हैं।


चार साल पहले दर्ज कराई गई थी एफआईआर…..


वक्‍फ की संपत्ति को लेकर धोखाधड़ी में 8 अगस्‍त 2016 में रिपोर्ट दर्ज की गई थी, इसके बाद 2017 में लखनऊ के हजरतगंज थाने में कानपुर की वक्‍फ संपत्ति को ट्रांसफर करने पर केस दर्ज हुआ था। इन दोनों दर्ज केस के आधार पर वसीम रिजवी के खिलाफ एफआईआर फाइल हुई है, रिजवी पर गंभीर आरोप है कि उन्‍होंशने शिया वक्‍फ बोर्ड का चेयरमैन रहते हुए वक्‍फ की संपत्तियों की खरीद-बिक्री में घोटाला किया है। वक्फ संपत्तियों के बेचे जानें की ये एफआईआर प्रयागराज में 2016 को और लखनऊ के हजरतगंज में साल 2017 में दर्ज की गई थी। लखनऊ में दर्ज मामला कानपुर के स्वरूप नगर की वक्फ जमीन से जुड़ा है।


मुख्यमंत्री द्वारा इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश किए जाने के बाद अपर मुख्य सचिव/गृह अवनीश अवस्थी ने 11 अक्टूबर 2019 को केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होने प्रयागराज की कोतवाली में और हजरतगंज थाने में दर्ज की गईं एफआईआर का जिक्र किया था। पत्र में उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अलावा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा भी वक्फ संपत्तियों के बेचे जाने के मामले में जांच करने का अनुरोध किया गया था।इलाहाबाद का मामला 2016 में इमामबाड़ा गुलाम हैदर में कथित अतिक्रमण और दुकानों के अवैध निर्माण से संबंधित है, जबकि लखनऊ का मामला 2009 में कानपुर के स्वरूप नगर में जमीन हड़पने के मामले से संबंधित है।


Source :Agency news