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लखीमपुर खीरी हिंसा: जांच कर रही एस.आई.टी ने चश्मदीद गवाहों से साक्ष्य देने के लिए निकाला विज्ञापन

    लखनऊ  /   लखीमपुर हिंसा कांड में उत्तर प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी गवाहों को सुरक्षा देने के निर्देश के बाद विशेष अनुसंधान दल (एसआइटी) ने जांच की गति और तेज कर दी है। एसआइटी ने चश्मदीद गवाहों से साक्ष्य देने का अनुरोध करते हुए विज्ञापन निकाला है। विज्ञापन में एसआइटी अपने सदस्यों के संपर्क नंबर जारी किया है। प्रत्यक्षदर्शियों से आगे आकर अपने बयान दर्ज कराने और डिजिटल साक्ष्य प्रदान करने के लिए उनसे संपर्क करने का आग्रह करती किया है। एसआइटी का कहना है कि ऐसे लोगों की जानकारी गोपनीय रखी जाएगी और उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाएगी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के सभी गवाहों को गवाह सुरक्षा योजना, 2018 के मुताबिक पुलिस सुरक्षा दी जाए। साथ ही कोर्ट ने अन्य महत्वपूर्ण गवाहों के बयान भी सीआरसीपी की धारा-164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष जल्द दर्ज कराने का निर्देश देते हुए कहा कि अगर बयान दर्ज करने के लिए मजिस्ट्रेट उपलब्ध नहीं हैं तो जिला जज नजदीक के मजिस्ट्रेट से बयान दर्ज कराएंगे। इसके अलावा कोर्ट ने हिंसा म

तब्लीगी जमात में दिल्ली पुलिस को झटका, विदेशियों को बरी करने के आदेश के खिलाफ दायर 44 याचिकाएं खारिज


दिल्ली की अदालत ने दिल्ली पुलिस द्वारा दायर 44 याचिकाओं को खारिज कर दिया। इन याचिकाओं में मजिस्ट्रेट की अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें विदेशी लोगों को वीजा प्रावधानों का उल्लंघन कर तबलीगी जमात कार्यक्रम में शामिल होने के अपराधों से बरी कर दिया गया था।


अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने गुरुवार को कहा कि रिव्यू पिटीशंस में कोई आधार नहीं है। मजिस्ट्रेट की अदालत ने 24 अगस्त को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और महामारी कानून की विभिन्न धाराओं के तहत 36 विदेशी नागरिकों के खिलाफ आरोप तय किए थे। इसके अलावा आपदा प्रबंधन कानून के तहत भी आरोप तय किए गए थे।


हालांकि, विदेशी नागरिकों को वीजा प्रावधानों के उल्लंघन, जीवन के लिए खतरनाक बीमारी के संक्रमण फैलाने जैसे आरोपों से बरी कर दिया गया था। जिन अपराधों के लिए उनके खिलाफ आरोप तय किए गए हैं, उनमें छह महीने से लेकर आठ साल तक की कैद की सजा हो सकती है।


पुलिस ने रिव्यू पिटीशन दायर कर अनुरोध किया था कि जिन अपराधों में 36 विदेशी नागरिकों को आरोपमुक्त किया गया था, उनमें आरोप तय किए जाएं। पुलिस ने मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश के खिलाफ भी याचिका दायर की थी जिसमें छह देशों के आठ विदेशी नागरिकों को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया था।


अदालत ने कहा कि आठ विदेशी नागरिकों को बरी किए जाने के संबंध में मजिस्ट्रेट का आदेश पूरी तरह विचार कर दिया गया था और उसमें किसी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। 


Sources:Hindustan Samachar


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