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सी.एम धामी आज कराएंगे नामांकन

देहरादून : सी.एम धामी आज यानि 27 जनवरी को खटीमा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन कराएंगे। आपको बता दें कि भाजपा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस बार भी खटीमा सीट से चुनाव लड़ाने का फैसला किया है। धामी के नामांकन के लिए गुरुवार का दिन तय किया गया है। सी.एम धामी ने कहा कि 2022 का चुनाव मुझे खटीमा की जनता लड़ाएगी और जिताएगी भी। सीएम का 26- 27 और 28 जनवरी को जनंसपर्क का कार्यक्रम है। वहीं कांग्रेस ने भुवन चंद्र कापड़ी को सीएम धामी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतारा है। गौरतलब है कि देहरादून से खटीमा जाते हुए सीएम धामी देर रात खटीमा में रुके थे। कार्यकर्ताओं के बीच धामी ने उनके साथ बैठक करी और खाना भी खाया। सीएम धामी ने कार्यकर्ताओं को कुछ चुनावी टिप्स भी दिए थे। चुनावी माहौल में सीएम धामी को अपने बीच पाकर कार्यकर्ता खुश हुए। सीएम धामी ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत होगी। वजह भी साफ है कि भाजपा सरकार ने समाज के हर वर्ग के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाईं हैं।   

दिल्ली की तरह लखनऊ के भी रास्ते करेंगे सील : राकेश टिकैत -

 


 

नयी दिल्ली /   केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों का पिछले 8 महीने से आंदोलन जारी है। इसी बीच भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बड़ा बयान दिया है। किसान नेता ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की तरह ही लखनऊ के रास्ते भी चारों तरफ से सील होंगे। इसकी तैयारी की जाएगी। समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि लखनऊ को भी दिल्ली बनाया जाएगा जिस तरह दिल्ली में चारों तरफ के रास्ते सील हैं, ऐसे ही सील होंगे। हम इसकी तैयारी करेंगे।उन्होंने कहा कि 8 महीने आंदोलन करने के बाद संयुक्त मोर्चा ने फैसला किया है कि हम उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब और पूरे देश में जाकर किसानों से अपनी बात रखेंगे और सरकार की नीति व काम को लेकर बात करेंगे। 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में बड़ी पंचायत होगी।गौरतलब है कि किसानों की सरकार से मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए। इसके अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) कानून बनाया जाए। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि वो कानून वापस नहीं लेंगे। लेकिन जरूरी संशोधन करने के लिए तैयार है। किसानों ने आठ महीने से जारी आंदोलन को गति देने के लिए जंतर-मंतर पर किसान संसद का आयोजन किया। रोजाना 200 किसान जंतर-मंतर पर किसान संसद का आयोजन करते है और शाम होते ही अपने आंदोलनस्थल पर वापस लौट जाते हैं। किसानों की इस संसद में स्पीकर की भी नियुक्ति होती है।वहीं दूसरी तरफ किसानों ने आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव को देखते हुए 'मिशन उत्तर प्रदेश' की योजना तैयार की है और उनका मुख्य फोकस चुनाव होगा। दिल्ली की ही तरह अब किसान संगठन के लोग लखनऊ में भी अपना डेरा डाल सकते हैं। हालांकि अभी तक स्पष्ट रणनीति तैयार नहीं हुई है। 


8 महीने आंदोलन करने के बाद संयुक्त मोर्चा ने फैसला किया है कि हम उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब और पूरे देश में जाकर किसानों से अपनी बात रखेंगे और सरकार की नीति व काम को लेकर बात करेंगे। 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में बड़ी पंचायत होगी: राकेश टिकैत, भारतीय किसान यूनियन

 

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