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हाथरस सामूहिक दुष्कर्म की बरसी पर सपा आज प्रदेश भर में सरकार के खिलाफ जलाएगी दीप

   हाथरस में पिछले साल एक दलित युवती से हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म और उपचार के दौरान उसकी मौत को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने मंगलवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)को 'दलितों और महिलाओं पर अत्याचार' याद दिलाने के लिए प्रदेश भर में दीप जलाने का आह्वान किया है। वहीं, भाजपा ने दावा किया है कि प्रदेश में महिलाएं सुरक्षित हैं और कानून का राज है। सपा ने मंगलवार को ट्वीट किया कि आज, 'हाथरस की बेटी की स्मृति दिवस' पर सभी प्रदेशवासियों, सपा और सहयोगी दलों से अपील है कि जिस तरह दुष्कर्म पीड़िता के शव को कुकृत्य करते हुए पेट्रोल डालकर आधी रात को परिवार की अनुपस्थिति में जला दिया गया था, उसके विरोध में दीप जलाकर भाजपा का दलितों, महिलाओं पर अत्याचार याद दिलाएं।  इससे पहले सपा अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गत बृहस्पतिवार को हर महीने की 30 तारीख को सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता हाथरस की बेटी की स्मृति दिवस मनाकर राज्य की भाजपा सरकार का दलित और महिला विरोधी चेहरा बेनकाब करने का आह्वान किया था। गौरतलब हैं कि हाथरस के एक गांव में पिछले साल 14 सितंबर को 1

कोरोना पर असलियत सरकारी दावों के विपरीत है -गुजरात उच्च न्यायालय

  


अहमदाबाद / गुजरात उच्च न्यायालय ने राज्य में कोविड-19 की स्थिति और लोगों को हो रही परेशानियों को लेकर सोमवार को राज्य सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि असलियत, सरकारी दावों के विपरीत है। मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति भार्गव कारिया की खंड पीठ ने राज्य में कोरोना वायरस की स्थिति पर एक जनहित याचिका पर स्वत: संज्ञान लेते कहा, “ लोग अब सोच रहे हैं कि वे भगवान की दया पर हैं। ” महाअधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने उच्च न्यायालय को उन कदमों के बारे में जानकारी दी जो राज्य सरकार ने कोविड-19 की स्थिति से निपटने के लिए उठाए हैं। इसके बाद, अदालत ने कहा कि असलियत सरकारी दावों के उलट है। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए की गई सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने कहा, “ आप जो दावा कर रहे हैं, स्थिति उससे काफी अलग है। आप कह रहे हैं कि सबकुछ ठीक है, लेकिन वास्तविकता उसके विपरीत है।” पीठ ने कहा कि लोगों में ‘विश्वास की कमी‘ है। अदालत ने कोविड-19 मरीजों के लिए रेमडिसिवर इंजेक्शन की कमी पर कहा, “ रेमडिसिविर (प्रमुख एंटी वायरल दवाई) की किल्लत नहीं है। आपके पास सबकुछ उपलब्ध है। हम नतीजे चाहते हैं, कारण नहीं।” अदालत ने कहा कि एक शख्स को आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट लेने में करीब पांच दिन लग रहे हैं। 

पीठ ने कहा कि जब आप के पास समय था तब आपने जांच केंद्रों को नहीं बढ़ाया।” गुजरात में रविवार को कोरोना वायरस के 5469 मामले आए जो महामारी शुरू होने के बाद सर्वाधिक एकदिनी बढ़ोतरी है। इसके बाद कुल मामले 3.47 लाख के पार चले गए। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, राज्य में रविवार को 54 लोगों की मौत हुई है जिसके बाद मृतक संख्या 4800 तक पहुंच गई है।

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