गहलोत.पायलट की तकरार तो अलग है राजस्थान भाजपा में भी कुछ कम नहीं है गुटबाजी

 



अशोक गहलोत और सचिन पायलट की तकरार के बाद भले ही राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी की खबरें आम हो गई हो। लेकिन ऐसा नहीं है कि वहां के मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा में यह सब नहीं हो रहा। भले ही विधानसभा चुनाव में अभी 3 साल बाकी है। लेकिन अशोक गहलोत को विपक्ष में रहते हुए भाजपा अब तक कोई बड़ी चुनौती नहीं दे पाई है। इसका सबसे बड़ा कारण यह माना जा रहा है कि प्रदेश में पार्टी आपस में ही बंटी हुई है और कई गुट फिलहाल अस्तिस्व में है। प्रदेश के कई नेता विधायक और पार्टी सदस्य लगातार आलाकमान तक इस बात का संदेश पहुंचा रहे हैं कि यहां गुटबाजी के कारण आने वाले चुनाव में नुकसान हो सकता है। हालांकि आलाकमान की ओर से अब तक इसको लेकर ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। जबकि भाजपा में गुटबाजी का खतरा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। गुटबाजी के कारण ही प्रदेश में भाजपा अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ कोई बड़ा आंदोलन अब तक नहीं कर सकी है। गुटबाजी बड़े नेताओं के बीच सबसे ज्यादा है। एक ओर जहां पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का गुट है तो वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया का भी अलग-अलग गुट है। अर्जुन राम मेघवाल के लिए भी अलग गुटबाजी है तो वही संगठन में अब तक काम कर रहे ओम प्रकाश माथुर के लिए भी एक अलग गुट नजर आता है। इन गुटों के समर्थक अलग-अलग सोशल मीडिया मंचों पर अपने अपने नेताओं को आने वाले चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताते हैं। और यही कारण है कि भाजपा की गुटबाजी की खबरें अब आम होती चली जा रही है। सबसे खास बात है कि गजेंद्र सिंह शेखावत और सतीश पूनिया की गुट में संघ के कई समर्थक भी शामिल है। पार्टी के ही कुछ नेताओं का मानना है कि राज्य के नेतृत्व में बदलाव बहुत जरूरी है। ऐसे इंसान को आगे किया जाना चाहिए जो सभी को साथ लेकर चलें। कई नेताओं ने तो राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव को राज्य की राजनीति में सक्रिय करने की बात कर दी है। हालांकि भूपेंद्र यादव ने अब तक राज्य की राजनीति में सक्रिय होने को लेकर कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है। लेकिन नेताओं को इस बात को लेकर भरोसा है कि वह आलाकमान की बात को नहीं टालेंगे। गुटों की बात करें तो सबसे ज्यादा मजबूत गुट पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का है। वसुंधरा राजे को लगभग 3 दर्जन से ज्यादा विधायकों का समर्थन हासिल है और यही कारण है कि जब अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच विवाद की स्थिति थी तब भाजपा कोई बड़े कदम नहीं उठा सके थी।वसुंधरा राजे की गुट ने तो अलग समर्थक मंच भी बना लिया है। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष लगातार यह कह रहे हैं कि अब तक पार्टी का सक्रिय नेता इस तरीके के गुटों में आगे नहीं आया है। भाजपा के कई नेता अपनी आकांक्षाओं की चाहत की वजह से चुप्पी साधे हुए हैं तो वही गहलोत लगातार विपक्ष पर गुटबाजी को लेकर निशाना साध रहे हैं। हाल ही में कांग्रेस के एक मंत्री ने यह कह दिया कि राजस्थान में भाजपा वसुंधरा राजे के बिना कुछ भी नहीं है। उन्होंने यह भी कह दिया कि वसुंधरा राजे की उपेक्षा होती है तो राज्य में भाजपा समाप्त हो जाएगी। गुटबाजी की खबरों के बीच आलाकमान कई बार राज्य के नेतृत्व से मुलाकात कर चुका है लेकिन अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा है। इस बात की उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले दिनों में राजस्थान की गुटबाजी की खबरें आलाकमान के कार्यवाही के बाद कम हो जाए। 


Sources:Agency News