नमामि गंगे प्रोजेक्ट: तीन साल में धरातल पर उतरा, गंगा में अब नहीं गिरेंगे गंदे नाले


गंगा को साफ, स्वच्छ, निर्मल बनाने के लिए शुरू हुआ नमामि गंगे प्रोजेक्ट भले ही 2014 में लांच हुआ, मगर उत्तराखंड के सभी प्रोजेक्ट मंजूर हुए मार्च 2017 के बाद। तीन वर्षों में उत्तराखंड में गंगा को साफ करने के लिए शुरू किए गए अधिकतर प्रोजेक्ट पूरे हो गए हैं। 32 में से 29 सीवर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार हुए। पुराने दो एसटीपी, जिनकी गुणवत्ता पर एनजीटी सवाल उठा चुका था, उन्हें भी दुरुस्त कर दिया गया।


मार्च 2014 में केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद नमामि गंगे प्रोजेक्ट लांच हुआ। इससे पहले गंगा सफाई से जुड़े काम नेशनल गंगा रिवर बेसिन अथॉरिटी के तहत हो रहे थे। 2014 में प्रोजेक्ट को नमामि गंगे नाम दिया गया। हालांकि उत्तराखंड में इस प्रोजेक्ट में तेजी मार्च 2017 के बाद ही आई।


32 एसटीपी, 135 नालों को टैप करने के प्रोजेक्ट मंजूर हुए। 1080 करोड़ का बजट भी मंजूर हुआ। पहली बार एसटीपी निर्माण क्षेत्र में पीपीपी मोड पर जगजीतपुर 68 एमएलडी का प्रोजेक्ट मंजूर किया गया। इसका निर्माण करने वाली कंपनी 15 साल तक संचालन भी करेगी।


गंगा में अब नहीं गिरेंगे गंदे नाले: गंगा में गिरने वाले कुल नालों की संख्या 135 है। इनमें सिर्फ 131 नालों को गंदा माना गया है। 126 नाले टैप कर एसटीपी तक पहुंचाए गए हैं। अब तीन नाले जोशीमठ और दो नाले श्रीकोट के हैं। ये काम बचे: अब सिर्फ तीन छोटे छोटे एसटीपी तैयार होने हैं। श्रीकोट के दो एसटीपी का काम दिसंबर, जोशीमठ का प्रोजेक्ट मार्च 2021 तक पूरा होगा। 


ट्रीटमेंट क्षमता दोगुनी से हुई ज्यादा: नमामि गंगे से पहले गंगा में गिरने वाले गंदे पानी को साफ करने की क्षमता सात करोड़ लीटर थी, जो अब बढ़कर 15 करोड़ लीटर हो गई है। पहले 70.225 एमएलडी के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट गंगा नदी कि किनारे थे। अब यह क्षमता बढ़ कर 152.51 एमएलडी पहुंच गई। अब अगले चरण में मंदाकिनी पर भी एसटीपी तैयार होंगे। 


35 साल से चल रही मुहिम
गंगा को साफ करने की मुहिम 35 साल से जारी है। सबसे पहले 1985 में गंगा एक्शन प्लान-वन से शुरुआत हुई। फिर एक्शन प्लान-दो में काम हुए। 2009 के बाद नेशनल गंगा रिवर बेसिन अथॉरिटी के तहत काम हुए। 2014 में नमामि गंगे प्रोजेक्ट में काफी तेजी दिखाई गई।


नमामि गंगे प्रोजेक्ट के काम रिकॉर्ड समय में पूरे किए गए हैं। मार्च 2017 के बाद सभी प्रोजेक्ट मंजूर हुए। फिर छोटे-छोटे तीन प्रोजेक्ट को छोड़कर अधिकतर पूरे भी कर लिए गए। गंगा की स्वच्छता से जुड़े अधिकतर काम पूरे किए जा चुके हैं।
केके रस्तोगी, महाप्रबंधक गंगा जल निगम


Source:Hindustan samachar