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पूर्व मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद सिंह रावत नहीं लड़ेंगे चुनाव

 देहरादून : बहुत बड़ी खबर निकल कर सामने आ रही है कि उत्‍तराखंड के पूर्व मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। जानकारी के मुताबिक उन्‍होंने भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर यह इच्‍छा जाहिर की है। उन्‍होंने कहा कि धामी के नेतृत्‍व में भाजपा की सरकार बनाने के लिए काम करना चाहता हूं।  जेपी नडडा को लिखे पत्र में उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर देने के लिए आभार भी व्‍य‍क्‍त किया है। साथ ही ये भी कहा है कि प्रदेश में युवा नेतृत्‍व वाली सरकार अच्‍छा काम कर रही है। उन्‍होंने कहा, बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में मुझे चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। इसलिए मेरा अनुरोध स्‍वीकार कर लिया जाए। आपको बता दें कि त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्र में लिखा कि मान्‍यवार पार्टी ने मुझे देवभूमि उत्‍तराखंड के मुख्‍यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर दिया यह मेरा परम सौभाग्‍य था। मैंने भी कोशिश की कि पवित्रता के साथ राज्‍य वासियों की एकभाव से सेवा करुं व पार्टी के संतुलित विकास की अवधारणा को पुष्‍ट करूं। प्रधानमंत्री जी का भरपूर सहयोग व आशीर्वाद मु

एयरशेड स्तर के नियंत्रण से 2030 तक दिल्ली की सर्दियों में प्रदूषण 35% तक किया जा सकता है कम: TERI

 

Climate कहानी



जब देश की राजधानी में एक बार फिर सांस फूलने लगी है, तब द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) के अज जारी  अध्ययन से कुछ उम्मीद बंधती है। इस अध्ययन में PM2.5 की सांद्रता को कम करने के तरीकों के साथ भविष्य के विभिन्न परिदृश्यों को प्रस्तुत किया गया है। 'दिल्ली में वायु प्रदूषण के नियंत्रण के लिए हस्तक्षेपों की लागत-प्रभावशीलता' के शीर्षक से आज जारी और ब्लूमबर्ग फिलान्थ्रोपीज़ द्वारा समर्थित यह अध्ययन कई हस्तक्षेपों की लागत प्रभावशीलता की भी जांच करता हैं और PM2.5 सांद्रता में कमी ला सकने में इनकी प्रासंगिकता का भी आकलन करता है।

मूल रूप से यह अध्ययन भविष्य के तीन अनुमान लगाता है - अल्पावधि में 2022 के लिएमध्यम अवधि में 2025 और विभिन्न हस्तक्षेपों के लिए वायु गुणवत्ता और लागत परिदृश्यों के आकलन के लिए लंबी अवधि में 2030 के लिए। अगर हम इसी गति पर रहे तोइस अध्ययन के आधार वर्ष 2019 की तुलना मेंसाल 2022, 2025 और 2030 में सर्दियों में PM2.5 की सांद्रता क्रमशः 9%, 21% और 28% गिरेगी ऐसी उम्मीद है। अध्ययन में नोट किया गया है कि हालांकि PM2.5 की सांद्रता वर्षों में मामूली रूप से गिर सकती हैलेकिन स्तर 60μg per m³ के राष्ट्रीय मानकों से काफी ऊपर बने रहेंगे।

2019 मेंदिल्ली में PM2.5 सांद्रता ने वार्षिक औसत मानकों का लगभग तीन गुना उल्लंघन किया। परिवहन (23%), बिजली संयंत्रों सहित उद्योग (23%), और बायोमास बर्निंग (14%) 2019 के दौरान दिल्ली में सर्दियों के समय प्रचलित PM2.5 सांद्रता में प्रमुख योगदानकर्ता थे।

अगर NCR और बाकी एयरशेड - एक भौगोलिक क्षेत्र है जिसके भीतर हवा सीमित है-  में सर्दियों के मौसम में PM2.5  के स्तर को नीचे लाया जाना है तो उत्सर्जन को रोकने के लिए और अधिक कड़े नियंत्रण की बात की गई है। बड़ी बात यह है कि एयरशेड स्तर के नियंत्रण से वर्ष 2030 तक सर्दियों के मौसम में PM2.5 सांद्रता को 35% तक कम किया जा सकता है।

TERI की महानिदेशक डॉ विभा धवन कहती हैं, "वायु प्रदूषण पर केवल सर्दियों के मौसम में ही नहींबल्कि पूरे साल एक समस्या के रूप में इस पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। NCR में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए पूरे एयरशेड में सख्त कार्रवाई की जरूरत है। आवश्यक गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के बजायस्वच्छ विकल्पों पर स्विच करना महत्वपूर्ण है।

दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर क्षेत्रीय स्रोतों से और ज़्यादा खराब होता है जो शहर के भीतर स्थानीय स्रोतों को जोड़ते हैं। क्षेत्र में वायु गुणवत्ता के प्रभावी नियंत्रण के लिए एयरशेड-आधारित क्षेत्रीय पैमाने पर वायु गुणवत्ता नियंत्रण की आवश्यकता होती है,” डॉ अंजू गोयलसह-परियोजना अन्वेषक और TERI में फेलो बताते हैं।

ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रोपी में भारत के जलवायु और पर्यावरण कार्यक्रमों का नेतृत्व करने वाली प्रिया शंकर कहती हैं, “वायु प्रदूषण संकट की गंभीरता और पैमाने को देखते हुएहमें सरकारव्यवसायनागरिक समाज और नागरिकों में बहु-स्तरीय कार्रवाई और सहयोग की आवश्यकता है। इस विश्लेषण से पता चलता है कि मज़बूत और निरंतर मिटिगेशन प्रयासों से दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार संभव है।

अध्ययन में परिवहनबायोमास और उद्योगों जैसे क्षेत्रों में विभिन्न नीतिगत हस्तक्षेपों से उत्सर्जन और PM2.5 सांद्रता में कमी की संभावनाओं का अनुमान लगाया गया है। यह वायु प्रदूषण को संबोधित करने के लिए एक एयरशेड दृष्टिकोण के स्वास्थ्य और आर्थिक सह-लाभों का भी आकलन करता हैऔर अगर 2022-2030 के बीच क्षेत्रीय PM2.5 नियंत्रण रणनीतियों को लागू किया जाता है तो 430 अरब रुपये (6.2 अरब डॉलर) के अतिरिक्त आर्थिक लाभ जैसे प्रत्यक्ष और संबद्ध लाभों की गणना करता है।

यह उम्मीद की जाती है कि एयरशेड क्षेत्र में वाहनों के विद्युतीकरणथर्मल पावर प्लांटों के पर्यावरण मानकों के कार्यान्वयनबेड़े के आधुनिकीकरणसार्वजनिक परिवहन में शिफ़्ट आदि सहित हस्तक्षेपों से वार्षिक औसत मानक को पूरा किया जा सकता है। लेकिन सर्दियों के दौरान राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों को प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त नियंत्रणजैसे कि खेतों में अमोनिया की रिलीज़ को रोकनाकचरा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करनाकोयला आधारित बिजली संयंत्रों को स्वच्छ ऊर्जा में परिवर्तित करनासबसे कठोर धूल दमन नियंत्रणईंट भट्ठों के लिए और स्वच्छ प्रौद्योगिकीइंडक्शन कुक-स्टोव का उपयोगऔर निर्माण गतिविधियों से धूल के सख्त नियंत्रण की आवश्यकता है।

अध्ययन के अनुसारसामान्य की तरह व्यवसाय परिदृश्य में पूरे एयरशेड में वैकल्पिक नियंत्रण रणनीतियों के कार्यान्वयन से 2022 में 14,000 से अधिक मौतों और 2030 में दिल्ली NCR में 12,000 मौतों से बचा जा सकता है। इस टाली गई मृतकों की संख्या के परिणामस्वरूप वर्ष 2022-2030 में लगभग 480-430 बिलियन ($6.9 - $6.2 बिलियन) का आर्थिक लाभ हो सकता है।



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