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त्रिपुरा हिंसा : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्‍य सरकार को दो हफ्ते के भीतर जवाब देने के दिए निर्देश

    नई दिल्‍ली /   सुप्रीम कोर्ट त्रिपुरा में हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामले में राज्य पुलिस की कथित मिली-भगत और निष्क्रियता के आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सोमवार को केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति डीवाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने सरकारों को दो हफ्ते के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है।  अधिवक्ता ई. हाशमी की ओर से दाखिल याचिका पर अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पैरवी की। उन्‍होंने सर्वोच्‍च अदालत से कहा कि वे हालिया साम्प्रदायिक दंगों की स्वतंत्र जांच चाहते हैं। इस मामले में अब दो हफ्ते बाद सुनवाई होगी। भूषण ने कहा कि सर्वोच्‍च अदालत के समक्ष त्रिपुरा के कई मामले लंबित हैं। पत्रकारों पर यूएपीए के आरोप लगाए गए हैं। यही नहीं कुछ वकीलों को नोटिस भेजा गया है। पुलिस ने हिंसा के मामले में कोई एफआइआर दर्ज नहीं की है। ऐसे में अदालत की निगरानी में इसकी जांच एक स्वतंत्र समिति से कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की प्रति केंद्रीय एजेंसी और

COP26 में लिया गया यह फ़ैसला क्या भेजेगा कोयले को इतिहास की किताब में?

 

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यूनाइटेड किंगडम के नेतृत्व मेंदुनिया के कुछ दो दर्जन देशों और अन्य संस्थानों नेग्लोबल कोल टू क्लीन पावर ट्रांजिशन स्टेटमेंट पर हस्ताक्षर कर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई कोयला बिजली उत्पादन में सभी निवेशों को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्धता दिखाई है।

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुएइस साल के जलवायु शिखर सम्मेलन, COP26, के अध्यक्ष आलोक शर्मा ने कहा, “आजमुझे लगता है कि हम कह सकते हैं कि कोयले का अंत निकट है।

आगे3जी में जीवाश् ईंधन अनुसंधान प्रबंधकलियो रॉबर्ट्स कहते हैं"ग्लासगो में पिछले कुछ दिनों के दौरान कोयले से विमुखता तेजी पकड़ रही है। नयी साझेदारियों और धन कोयले को इतिहास की बात बनाने के लिये एक साथ  रहे हैं। देशों की प्रतिबद्धताओं को गंभीर दानदाताओं के धन से सम्बल मिला हैजो दुनिया के कोयला जलाने वाले देशों को सबसे अधिक प्रदूषणकारी जीवाश्म ईंधन से मुंह मोड़ने और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को लागू करने में मदद करने के लिए नए तंत्र और उपकरणों से लैस है।” 

वो आगे कहते हैं, बृहस्पतिवार को की गयी घोषणाओं और की गयी पहल की व्यापकता  गहराई पर गौर करें तो इससे यह इशारा मिलता है कि कोयले से पीछा छुड़ाने का सिलसिला कितनी तेजी से रफ्तार पकड़ रहा है। अनेक देश कोयले से चलने वाली नयी परियोजनाओं पर निवेश बंद करने का निर्णायक विकल् चुन रहे हैं। अनेक देशों ने तो अपने-अपने कोयला बिजलीघरों को आवश्यक रूप से बंद करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। संयुक् रूप से ये घोषणाएं यह जाहिर करती है कि कोयला युग का अंत अब नजदीक  रहा है। कोयले को इतिहास के कूड़ेदान में ले जाने वाली कन्वेयर बेल्ट आगे बढ़ रही है। वैश्विक तापमान में वृद्धि को डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लक्ष् के अनुरूप इसे और तेज करने की आवश्यकता है।"

सीओपी26 में कोयले की प्रगति दर्शाती है कि वैश्विक कोयले से बाहर निकलने के लिए परिस्थितियाँ परिपक्व हैं। अब हमें बड़े पैमाने पर आने वाले स्वच्छ ऊर्जा वित्त को सभी देशों को तेजी से उपलब्ध कराने की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी देश 2030 तक ओईसीडी देशों को कोयला मुक्त और शेष दुनिया को 2040 तक कोयले से स्वच्छ बनाने के लिए आत्मविश्वास से आगे बढ़ सकें।

इसी क्रम में, एम्बर के ग्लोबल लीड डेवी जोंस ने कहाआज की प्रतिबद्धताओं से सभी महाद्वीपों को कोयले को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की अपनी यात्रा में मदद मिलेगी। यह इतना बड़ा क्षण है क्योंकि अब तक वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने की महत्वाकांक्षा में सबसे बड़ा अंतर कोयला उत्पादन में तेजी से गिरावट है - यानी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के लिए 2030 तक और शेष दुनिया में 2040 तक कोयला बिजली को चरणबद्ध ढंग से समाप् करना।’’

यूरोप मेंपोलैंड कोयले का आखिरी बड़ा गढ़ हैऔर यह ज्यादातर यूरोप की कोयला-मुक्त बनने के सफर को अंजाम देगा। अफ्रीका मेंदक्षिण अफ्रीका और मोरक्को अफ्रीका के 95% कोयला उत्पादन के लिए जिम्मेदार हैंइसलिए यह अफ्रीका को कोयला मुक्त बनने की ओर ले जाएगा। एशिया मेंवियतनाम जैसे विकासशील देश पहली बार कोयले को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दुनिया के तीन सबसे बड़े कोयला देशों - चीनभारत और अमेरिका ने पहले ही प्रतिबद्धताएँ बना ली हैं जो अपनी बिजली प्रणालियों को कोयले से दूर ले जाने की शुरुआत कर रहे हैं। यह गति इस तथ्य को रेखांकित करती है कि कोयले से स्वच्छ बिजली में तत्काल रूपांतरण करना अर्थव्यवस्थास्वास्थ्य और जलवायु के लिए सबसे अच्छा विकल्प है।’’


यह ब्रिटिश सरकार द्वारा तैयार की गयी साइन-ऑन सूची नहीं है। इन देशों में से प्रत्येक में यह वर्षों का राष्ट्रीय कार्य है और वे इस

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