तालिबानियों की मदद कर रहा पाकिस्‍तान

 

 

 


अफगानिस्तान में बढ़ते तनाव के बीच अब अमेरिका, पाकिस्तान और अफगान नेताओं ने आने वाले समय में गृहयुद्ध की चेतावनी दी है। टीओआई में छपी एक खबर के मुताबिक, पाकिस्तान से कई "जिहादी" पहले ही अफगानिस्तान में फैलने लगे हैं और कई लाशों के रूप में लौटे हैं। युद्ध से तबाह देश से अमेरिका और नाटो सैनिकों की वापसी की घोषणा के बाद तालिबान की खूनी जंग और भी तेज हो गई है। बता दें कि तालिबानियों की मदद करने के लिए पाकिस्तानी धार्मिक मदरसों के कई छात्रों को आतंकवादियों की श्रेणी में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे है। इसके साथ ही पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में मौलवी भी अफगान तालिबान के लिए समर्थन मांग रहे हैं और यहां तक ​​कि चंदा भी मांग रहे हैं।

पाकिस्तान का इससे इनकार!

बता दें कि इस्लामाबाद इस बात से इनकार करता आ रहा है कि पाकिस्तान से "जिहादी" अफगानिस्तान जा रहे हैं।उत्तर-पश्चिम में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत और दक्षिण-पश्चिम में बलूचिस्तान में स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में अफगानिस्तान में तालिबान के साथ अफगान बलों के खिलाफ लड़ते हुए दर्जनों पाकिस्तानी मारे गए हैं। स्थानीय लोगों ने कहा कि सैकड़ों लोग दोनों प्रांतों के विभिन्न हिस्सों में पाकिस्तानी लड़ाकों के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। जानकारी के लिए बता दें कि, बलूचिस्तान में, स्थानीय और अफगान आतंकवादियों के शवों के आने पर अफगानिस्तान के साथ सीमा पर पश्तून भाषी क्षेत्रों में अक्सर अंतिम संस्कार और प्रार्थना करते है। तालिबान अंतिम संस्कार में भाषण देते हैं। क्वेटा और बलूचिस्तान के अन्य हिस्सों में कई स्थानीय लोगों और गवाहों ने दावा किया कि उनके क्षेत्रों में तालिबान समर्थक गतिविधियों में वृद्धि हुई है। पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री शेख रशीद अहमद ने स्वीकार किया था कि देश में आने वाले शव अफगान तालिबान के थे क्योंकि उनमें से कई के परिवार पाकिस्तान में रहते हैं।