कांग्रेस में एडजस्ट नहीं हो पा रहे हार्दिक पटेल,अब नए ठिकाने की कर रहे तलाश

  

 हार्दिक पटेल वो युवा नेता, जिन्होंने 2015 में पाटीदारों के लिए ओबीसी कोटा की मांग वाले आंदोलन के साथ भाजपा सरकार को चुनौती दी थी आज वहीं नेता अपनी ही पार्टी कांग्रेस से खुद को अलग-थलग पा रहे है। ऐसा लग रहा है कि उनकी खुद की पार्टी ही  "उन्हें नीचे गिराने में लगी हुई है। जब गुजरात के निकाय चुनाव के नतीजें सामने आए तो हार्दिक का दर्द भी सामने आया। उनके मुताबिक, निकाय चुनावों के दौरान न ही उनसे उम्मीदवार के बारे में कोई चर्चा की गई और न ही उन्हें पाटीदार बहुल इलाकों में पार्टी का प्रचार करने के लिए कहा गया। सवाल तो यह भी उछ रहे है कि अब अगर कांग्रेस से कोई नेता बाहर होता है तो क्या वो हार्दिक पटेल होंगे? क्या वह बागी बनकर पार्टी को छोड़ने का फैसला ले सकते है?एक खबर को दिए इंटरव्यू में हार्दिक ने बताया कि, कांग्रेस के राज्य नेतृत्व ने नगर निगमों, नगर पालिका, जिला पंचायत या तालुका पंचायत चुनावों से पहले उनकी एक भी सार्वजनिक बैठक आयोजित नहीं की थी।पिछले 10 दिनों में, हार्दिक कहते हैं कि उन्होंने 27 सार्वजनिक रैलियों को संबोधित किया, सभी अपने दम पर।

अपनों ने ही किया पराया? क्यों खफा है हार्दिक

साल 2019 मार्च में जब राहुल गांधी ने हार्दिक पटेल को गुजरात कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया तो उनपर काफी बड़ी जिम्मेदारियां भी बढ़ी लेकिन उनकी यह खुशी नजदीकी प्रदेश पार्टी में तमाम बड़े चेहरों का बिल्कुल भी रास नहीं आई। माना जाता है कि, हार्दिक अपने कुछ लोगों को निकाय चुनावों में सूरत में अपने नजदीकी लोगों को टिकट देना चाहते थे लेकिन पार्टी में उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। आपको बता दें कि गुजरात कोर्ट ने कुछ समय पहले हार्दिक को गुजरात से बाहर निकलने पर रोक लगा दीथी लेकिन पिछलें दिनों ही उन्हें पार्टी से संबंधित काम के सिलसिले में दिल्ली और अन्य स्थानों की यात्रा के लिए 15 दिनों के लिए राज्य के बाहर जाने की अनुमति दी है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, पटेल को दो सप्ताह के लिए यानि की आठ मार्च से 23 मार्च के बीच, सोमवार से गुजरात जाने की अनुमति दी ताकि वह पार्टी के कुछ कामों के लिए दिल्ली जा सकें और अपने लंबित मामले के लिए वकीलों से परामर्श कर सकें।


Sources:Agency News