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लखीमपुर खीरी हिंसा: जांच कर रही एस.आई.टी ने चश्मदीद गवाहों से साक्ष्य देने के लिए निकाला विज्ञापन

    लखनऊ  /   लखीमपुर हिंसा कांड में उत्तर प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी गवाहों को सुरक्षा देने के निर्देश के बाद विशेष अनुसंधान दल (एसआइटी) ने जांच की गति और तेज कर दी है। एसआइटी ने चश्मदीद गवाहों से साक्ष्य देने का अनुरोध करते हुए विज्ञापन निकाला है। विज्ञापन में एसआइटी अपने सदस्यों के संपर्क नंबर जारी किया है। प्रत्यक्षदर्शियों से आगे आकर अपने बयान दर्ज कराने और डिजिटल साक्ष्य प्रदान करने के लिए उनसे संपर्क करने का आग्रह करती किया है। एसआइटी का कहना है कि ऐसे लोगों की जानकारी गोपनीय रखी जाएगी और उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाएगी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के सभी गवाहों को गवाह सुरक्षा योजना, 2018 के मुताबिक पुलिस सुरक्षा दी जाए। साथ ही कोर्ट ने अन्य महत्वपूर्ण गवाहों के बयान भी सीआरसीपी की धारा-164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष जल्द दर्ज कराने का निर्देश देते हुए कहा कि अगर बयान दर्ज करने के लिए मजिस्ट्रेट उपलब्ध नहीं हैं तो जिला जज नजदीक के मजिस्ट्रेट से बयान दर्ज कराएंगे। इसके अलावा कोर्ट ने हिंसा म

अमेरिका और तालिबान के बीच समझौते का शांति से कोई संबंध नहीं,हुसैन हक्कानी

वाशिंगटन/अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक हुसैन हक्कानी ने कहा है कि अमेरिका और तालिबान के बीच हुए समझौते का शांति से कोई संबंध नहीं है और यह मूल रूप से युद्धग्रस्त अफगानिस्तान से अमेरिकी सुरक्षा बलों की वापसी संबंधी समझौता है। थिंक टैंक ‘हडसन इंस्टीट्यूट’ द्वारा अफगान शांति प्रक्रिया, प्रगति या संकट विषय पर ऑनलाइन आयोजित समारोह में हक्कानी ने कहा, मैं अमेरिका और तालिबान के बीच समझौते का लंबे समय से आलोचक हूं। मेरा मानना है कि इस समझौते का शांति से कोई लेना-देना नहीं है और यह सुरक्षा बलों की वापसी का समझौता है। तालिबान से केवल एक चीज की प्रतिबद्धता व्यक्त करने को कहा गया कि वे अंत अफगान वार्ता करेंगे ना कि वे शांति के लिए सहमत होंगे। ट्रंप प्रशासन ने दोहा में पिछले साल फरवरी में तालिबान के साथ शांति समझौता किया था। समझौते में आतंकवादी समूह की ओर से सुरक्षा की गारंटी के बदले अफगानिस्तान से अमेरिकी बलों की वापसी की योजना बनाई गई थी। हक्कानी ने कहा कि तालिबान की शांति की परिअमेरिका की परि से बहुत अलग है। हडसन इंस्टीट्यूट में दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों के निदेशक हक्कानी ने कहा,तालिबान का मानना था कि जब उसके इस्लामी अमीरात की स्थापना हो जाएगी तभी शांति स्थापित होगी। Sources:Agency News

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