NIA का बड़ा दावा, ISI ने नवलखा को सरकार के खिलाफ बुद्धिजीवियों को एकजुट करने का काम सौंपा था


एनआईए की चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि आईएसआई की तरफ से गौतम नवलखा को मोदी सरकार के खिलाफ बुद्धिजीवियों को एकजुट करने का काम सौंपा था।



 


महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपी गौतम नवलखा को लेकर देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी एनआईए ने बड़ा दावा किया है। एनआईए ने गौतम नवलखा के आईएसआई से लिंक का दावा किया है। एनआईए की चार्जशीट के अनुसार आईएसआई की तरफ से गौतम नवलखा को मोदी सरकार के खिलाफ बुद्धिजीवियों को एकजुट करने का काम सौंपा था। वह कुछ तथ्य-खोज समितियों का हिस्सा थे और उन्हें सीपीआई (माओवादी) की गुरिल्ला गतिविधियों के लिए कैडर भर्ती करने का काम सौंपा गया था।




गौरतलब है कि गौतम नवलखा एक समाजसेवक के तौर पर जाने जाते हैं और भीमा कोरेगांव केस में हिंसा फैलाने को लेकर उन पर केस चल रहा है। एनआईए ने नवलखा को 14 अप्रैल को आनंद तेलतुम्बडे के साथ गिरफ्तार किया गया था। लेकिन एनआईए के इतने बड़े खुलासे ने गौतम नवलखा पर नई बहस छेड़ दी है।




एनआईए की चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर हनी बाबू नक्सली क्षेत्रों में विदेशी मीडिया की यात्राओं के आयोजन में सहायक थे और उन्हें आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन रिवोल्यूशनरी डेमोक्रेटिक फ्रंट (आरडीएफ) के कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। एनआईए ने 28 जुलाई को बाबू को नोएडा स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया था। 


क्या है भीमा कोरगांव मामला


महाराष्ट्र के पुणे के पास भीमा कोरेगांव में 31 दिसंबर 2017 को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में 200 वर्ष पहले हुए कोरेगांव युद्ध को याद किया गया। पुणे शहर में हुए एल्गार परिषद सम्मेलन के दौरान कथित तौर पर उकसाने वाले भाषण दिए गए थे। पुणे पुलिस ने इस मामले में क्रमश: 15 नवंबर, 2018 और 21 फरवरी, 2019 को एक आरोप पत्र और एक पूरक आरोप पत्र दायर किया था। बाद में केंद्र सरकार ने इस मामले को एनआईए के हवाले कर दिया था। गिरफ्तार लोगों को अर्बन नक्सल बताकर उन पर प्रधानमंत्री मोदी की हत्या की साजिश का आरोप भी लगा दिया गया। 


Source:Agency News