सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Featured Post

पूर्व मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद सिंह रावत नहीं लड़ेंगे चुनाव

 देहरादून : बहुत बड़ी खबर निकल कर सामने आ रही है कि उत्‍तराखंड के पूर्व मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। जानकारी के मुताबिक उन्‍होंने भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर यह इच्‍छा जाहिर की है। उन्‍होंने कहा कि धामी के नेतृत्‍व में भाजपा की सरकार बनाने के लिए काम करना चाहता हूं।  जेपी नडडा को लिखे पत्र में उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर देने के लिए आभार भी व्‍य‍क्‍त किया है। साथ ही ये भी कहा है कि प्रदेश में युवा नेतृत्‍व वाली सरकार अच्‍छा काम कर रही है। उन्‍होंने कहा, बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में मुझे चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। इसलिए मेरा अनुरोध स्‍वीकार कर लिया जाए। आपको बता दें कि त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्र में लिखा कि मान्‍यवार पार्टी ने मुझे देवभूमि उत्‍तराखंड के मुख्‍यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर दिया यह मेरा परम सौभाग्‍य था। मैंने भी कोशिश की कि पवित्रता के साथ राज्‍य वासियों की एकभाव से सेवा करुं व पार्टी के संतुलित विकास की अवधारणा को पुष्‍ट करूं। प्रधानमंत्री जी का भरपूर सहयोग व आशीर्वाद मु

मनरेगा ने थामा हाथ हजारों को सालभर मुहैया कराया रोजगार




देहरादून : हम सब जानते हें कि कोरोना की पहली और दूसरी लहर ने बड़ी तादाद में नागरिकों के रोजगार का पहिया जाम कर दिया है। जहां कोरोना की पहली व दूसरी लहर में बड़ी संख्या में युवा व अन्य व्यक्ति कामकाज छोड़कर अपने-अपने घरों को लौटने को विवश हो गए थे। लेकिन अब खाली हाथों को काम तो चाहिए और सरकार ने भी इस बात को समझते हुए मनरेगा जैसी योजनाओं में सक्रियता बढ़ाने के निर्देश दिए।

देहरादून जिला प्रशासन ने भी इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए और बीते साल की तरह इस मर्तबा भी मनरेगा के माध्यम से लाखों व्यक्तियों को सालभर रोजगार मुहैया कराया। देहरादून जिले में दिसंबर माह तक ही 11 लाख से अधिक मानव दिवस सृजित कर दिए गए।

जिला विकास अधिकारी के मुताबिकए कोरोना के प्रभाव को देखते हुए 15 लाख से अधिक मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। दिसंबर माह तक आंकड़ा 11 लाख पार करना बताता है कि मनरेगा में इच्छुक व्यक्तियों को भरपूर काम मिल रहा है और उनकी आजीविका का इंतजाम निरंतर हो रहा है। सबसे खास बात यह है कि मनरेगा में महिलाओं को भी भरपूर काम मिला और महिलाओं के चार लाख से अधिक मानव दिवस सृजित किए गए।

मनरेगा में काम की गारंटी के साथ लाभार्थियों को प्रतिदिन 200 रुपये से ज्यादा का भुगतान भी दिया गया और इनके माध्यम से ग्राम स्तर पर विभिन्न तरह के सात हजार 124 काम भी प्रस्तावित किए गए हैं। इसमें खेतीबाड़ी से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक के काम शामिल है। यानी संबंधित व्यक्ति अपने क्षेत्र में अपने लिए ही काम कर रहे हैं और साथ में मेहनताना भी मिल रहा है। मनरेगा में अब तक 1426 काम पूरा किए जा चुके हैं। देखा जाये तो कुल मिलाकर मनरेगा ने खाली हाथों को काम देने में बेहतर भूमिका निभाई।

टिप्पणियाँ

Popular Post