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इंटरनेट मीडिया से हो रहे चुनाव प्रचार में ग्रामीण भारत का एक बड़ा वर्ग अछूता

जैसा कि आपको मालूम है कि कोविड-19 की गाइडलाईन को ध्यान में रखकर चुनाव आयोग ने वर्चुअल रैली और प्रचार प्रसार के निर्देश जारी किये थे। जैसा की आपको मालूम है कि इस वक्त देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैंऔर कोरोना की वजह से न तो रैलियां हो रही हैं और न ही रोड शो के जरिये राजनीतिक दल जनता के बीच अपना शक्ति प्रदर्शन ही कर पा रहे हैं।  लिहाजा सारा चुनाव प्रचार डिजिटल प्रारूप में ही सिमट कर रह गया है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की पाबंदी के कारण राजनीतिक दल और नेता इंटरनेट मीडिया के विभिन्न मंचों के जरिये जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में लगे हैं। इन्हीं मंचों पर अपनी प्रचार सामग्री को परोसकर पार्टियां चुनाव में अपनी स्थिति को मजबूत करने में जुटी हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए इस बार राजनीतिक पार्टियां लोकगीतों के रूप में अपने अपने प्रचार गीत बनवाकर  इंटरनेट मीडिया के मंचों पर उन्हें साझा करके जनता के दिलोदिमाग पर छा जाने को बेताब हैं। इस संग्राम में आगे निकल जाने की स्पर्धा लगभग सभी दलों में दिखाई दे रही है। ऐसे में यहां यह सवाल तैर रहा है कि लोकतंत्र के इस चुनावी त्योहार में क्या यह

हेलीकॉप्टर और तोप से नहीं नागरिकों से मजबूत होता है देश: राहुल गांधी

  


कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उनकी चिंता केवल दो-तीन उद्योगपतियों के हितों के साधने तक है। देश के आम आदमी, किसान, छोटे कारोबारियों की उन्हें कोई चिंता नहीं है। वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध की पचास साल होने के उपलक्ष्य में परेड मैदान में आयेाजित विजय संकल्प रैली में राहुल ने कहा कि कृषि कानून, जीएसटी, नोटबंदी आदि सभी फैसले उद्योगपति मित्रों को लाभ पहुचाने के लिए बनाए गए हैं। आम आदमी जब अपनी गाड़ी में पेट्रोल भराता है तो उस पर लगने वाला टैक्स सीधा पीएम के उद्योपति मित्रों की जेब में चला जाता है। देश हेलीकॉप्टर, जहाज, तोप से मजबूत नहीं होने वाला। देश मजबूत तब होगा देश का हर नागरिक मजबूत होगा।आज देश को बांटा जा रहा है। भाई को भाई से लड़ाया जा रहा है। भाई भाई को डरा रहा है। वर्ष 1971 में हमने पाकिस्तान को इसलिए 13 दिन में हरा दिया था क्योंकि पूरा देश एक था। अमेरिका को 20 साल लग गए थे अफगानिस्तान में। जबकि भारत ने एकता के बल पर पाक को चंद दिनों में पराजित कर उसक दो दो टुकड़े कर दिए थे। राहुल ने उत्तराखंड की जनता से वादा किया कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आने पर रोजगार के अवसर सृजित किए जाएंगे। छोटे-मंझोले कारोबारियों के हितों की रक्षा की जाएगी। किसान के हितों की रक्षा होगी और उसी के अनुसार कानून बनाए जाएंगे। करीब 27 मिनट के भाषण में राहुल ने जहां पीएम मोदी, कुछ उद्योगपतियों पर जमकर निशाना साधा। वहीं वो उत्तराखंड के साथ अपने अपने परिवार के बलिदान के रिश्ते के आधार पर नात जोड़ते रहेराहुल ने कहा कि वर्ष 1971 की जंग में इंदिरा की भूमिका सभी को पता है। पर आज, जिस महिला ने अपने देश के लिए 32 गोलियां खाई। आज बांग्लादेश के गठन को लेकर दिल्ली में हो रहे कार्यक्रम में इंदिरा जी का नाम तक नहीं लिया जा रहा है।राहुल ने कहा कि उत्तराखंड के साथ मेरा कुर्बानी का रिश्ता है। मेरी दादी, मेरे पिता देश के लिए शहीद हुए। मैं वो दिन नहीं भूल सकता जब स्कूल में मुझे सूचना मिली कि मेरी दादी को 32 गोलियां लगी हैं। आपके घरों में भी अक्सर सूचना आती हैं कि पापा नहीं रहे। चाचा नहीं रहे। आपके बलिदान को मैं और मेरे परिवार के बलिदान को आप गहराई से समझ सकते हैं। इस बात को वो नहीं समझ सकते जिनका बलिदान से कोई रिश्ता नहीं रहा।

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