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इंटरनेट मीडिया से हो रहे चुनाव प्रचार में ग्रामीण भारत का एक बड़ा वर्ग अछूता

जैसा कि आपको मालूम है कि कोविड-19 की गाइडलाईन को ध्यान में रखकर चुनाव आयोग ने वर्चुअल रैली और प्रचार प्रसार के निर्देश जारी किये थे। जैसा की आपको मालूम है कि इस वक्त देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैंऔर कोरोना की वजह से न तो रैलियां हो रही हैं और न ही रोड शो के जरिये राजनीतिक दल जनता के बीच अपना शक्ति प्रदर्शन ही कर पा रहे हैं।  लिहाजा सारा चुनाव प्रचार डिजिटल प्रारूप में ही सिमट कर रह गया है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की पाबंदी के कारण राजनीतिक दल और नेता इंटरनेट मीडिया के विभिन्न मंचों के जरिये जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में लगे हैं। इन्हीं मंचों पर अपनी प्रचार सामग्री को परोसकर पार्टियां चुनाव में अपनी स्थिति को मजबूत करने में जुटी हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए इस बार राजनीतिक पार्टियां लोकगीतों के रूप में अपने अपने प्रचार गीत बनवाकर  इंटरनेट मीडिया के मंचों पर उन्हें साझा करके जनता के दिलोदिमाग पर छा जाने को बेताब हैं। इस संग्राम में आगे निकल जाने की स्पर्धा लगभग सभी दलों में दिखाई दे रही है। ऐसे में यहां यह सवाल तैर रहा है कि लोकतंत्र के इस चुनावी त्योहार में क्या यह

सेना प्रमुख को मिली नई जिम्मेदारी, CDS नहीं COSC चेयरमैन बने जनरल नरवणे

  


सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को देश का नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनाए जाने की अटकलों के बीच उन्हें चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है। तीनों सेनाओं के प्रमुखों की मौजूदगी वाली कमेटी के चेयरमैन की ये पोस्ट जनरल बिपिन रावत के निधन के बाद से खाली पड़ी थी। हालांकि जनरल नरवणे की नियुक्ति की रक्षा मंत्रालय ने अभी तक औपचारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन हिन्दुस्तान टाइम्स ने अनुसार जनरल नरवणे की नियुक्ति की बात अपने रिपोर्ट में की है। सूत्रों ने ये भी कहा कि नए सीडीएस को लेकर अभी चर्चा नहीं हुई है। लेकिन जनरल नरवणे को तीनों सेनाओं के प्रमुखों में सबसे सीनियर होने के चलते सीओएससी चेयरमैन बनाया गया है। इससे उनके अगले सीडीएस बनने का दावा और ज्यादा मजबूत हो गया है। सीओएससी तीनों सेनाओं के प्रमुखों की मौजूदगी वाली कमेटी है जो तीनों सेनाओं के बीच ऑपरेशन और दूसरे मुद्दों को लेकर कॉर्डिनेशन बनाए रखने का काम करती है। जनरल नरवणे को उसी पुरानी परंपरा के तहत सीओएससी चेयरमैन बनाया गया। जो सीडीएस का पद बनाए जाने से पहले लागू थी। इस परंपरा के तहत तीनों सेनाओं के प्रमुखों में से सबसे सीनियर अधिकारी को सीओएससी चेयरमैन नियुक्त किया जाता है। सेना के तीनो प्रमुख अंगों की बात करें तो जनरल एमएम नरवणे 31 दिसंबर 2019 को आर्मी चीफ बने। एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी 30 सितंबर 2021 को एयरचीफ का पद  संभाला और एडमिरल आर हरिकुमार ने 30 नवंबर 2021 को नेवी चीफ की जिम्मेदारी संभाली।

सीडीएस की जिम्मेदारियां 

चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ एक साथ तीन ज़िम्मेदारियाँ संभालते थे। पहला सीडीएस की ज़िम्मेदारी। दूसरा चेयरमैन, चीफ़ ऑफ़ स्टॉफ़ कमेटी और तीसरी ज़िम्मेदारी सचिव, डीएमए की थी. डीएमए यानी डिपार्टमेंट ऑफ़ मिलिट्री अफ़ेयर्स। ये रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला सैन्य मामलों का विभाग है। साथ ही सीडीएस परमाणु कमान प्राधिकरण के सैन्य सलाहकार भी होते हैं। एकीकृत क्षमता विकास योजना के तहत सीडीएस रक्षा से जुड़ी पूंजीगत अधिग्रहण पंचवर्षीय योजना और दो वर्षीय सतत् वार्षिक अधिग्रहण योजना को भी कार्यान्वित करते हैं। 

बता दें कि देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत का 8 दिसंबर को हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन हो गया। जनरल रावत अपनी पत्नी मधुलिका रावत और अपने 12 अन्य सैन्य अफसरों के साथ तमिलनाडु के कन्नूर में एक कार्यक्रम में जा रहे थे।  

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