मुसलमान खुद करें अपनी बहन बेटियों की हिफाजत, बेटियाें काे दहेज में दे विरासत का हिस्सा

 

 


  उर्स-ए-रजवी के दूसरे दिन का आगाज फज्र की नमाज के बाद कुरानख्वानी से हुआ। दरगाह और आसपास की गलियां अकीदतमंदों से गुलजार हो रहीं। महफिल में नामवार उलमाओं ने तकरीर पेश कीं। दूसरे दिन भी कार्यक्रम दरगाह प्रमुख हजरत मौलाना सुब्हान रजा खान (सुब्हानी मियां) व सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी की सदारत व उर्स प्रभारी सय्यद आसिफ मियां की देखरेख में कोविड गाइडलाइन के अनुसार हुए। इसमें सीमित संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर आला हजरत को खिराज पेश किया। रविवार सुबह आठ बजे महफिल का आगाज कारी सखावत ने तिलावत-ए-कुरान से किया। हाजी गुलाम व आसिम नूरी ने मिलाद नजराना पेश किया।दिन में नात-ओ-मनकबत का दौर जारी रहा। मुख्य कार्यक्रम रात नौ बजे शुरू हुआ। इसमें देश भर के नामवर उलमा की तकरीर हुई। मौलाना मुख्तार बहेड़वी ने कहा कि पर्दा इस्लाम का अहम हिस्सा है। मौजूदा हालात के मद्देनजर मुसलमान अपनी बहन-बेटियों की खुद हिफाजत करें। उनको पर्दा करने की ताकीद करे। बेटियां जब शादी लायक हो जाएं तो अच्छा घर देखकर उनकी शादी कर दें। बेटियों को दहेज देने की जगह अपनी विरासत में हिस्सा दें। मुफ्ती सलीम नूरी ने कहा कि हमें बुजुर्गो से फैज हासिल करना है तो शरीयत के मुताबिक चलना होगा। उन्होंने नौजवानों को आगाह करते हुए कहा कि वे गुमराह न हो। दुनिया भर में मसलक ए आला हजरत पर जो काम चल रहा है, यह सब रेहान-ए-मिल्लत की देन है।कारी सखावत ने कहा कि आला हजरत व मुफ्ती आजम ¨हद के दर से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटा। आला हजरत ने मजहबी खिदमात के साथ साइंस पर कलम चलाई। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मौजूदा वक्त में मुसलमानों के सुलगते मसलों पर चर्चा की। मौलाना जाहिद रजा, मौलाना बाशीरुल कादरी, मुफ्ती अनवर हुसैन (नेपाल) आदि ने भी खिताब किया। देर रात 1.40 बजे मुफ्ती आजम ¨हद की कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि कार्यक्रम की निजामत (संचालन) कारी यूफुस रजा संभली ने की। मदरसा मंजर-ए-इस्लाम के सदर (¨प्रसिपल) मुफ्ती आकिल, मुफ्ती सलीम नूरी, मुफ्ती अफरोज आलम, मुफ्ती जमील, मौलाना अख्तर, मुफ्ती मोइनुद्दीन की मौजदूगी में उलमा की तकरीर का सिलसिला चलता रहा।खुसूसी खिताब मुफ्ती अय्यूब, मौलाना डा. एजाज अंजुम, कारी अब्दुर्रहमान कादरी, मौलाना स्वाले हसन, मौलाना अबु बकर, मौलाना कमर रजा ने खिताब किया। सभी वक्ताओं ने सुन्नियत व आला हजरत के मिशन पर रोशनी डाली। आला हजरत के मिशन को फरोग देने वाले हुज्जातुल इस्लाम, मुफ्ती आजम ¨हद, मुफस्सिर ए आजम व रेहान ए मिल्लत की ¨जदगी व कारनामों को याद कर खिराज पेश किया। सुबह 9.58 बजे रेहान ए मिल्लत व 10.40 पर हजरत जिलानी मियां के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। कारी सखावत ने फातिहा पढ़ी। शजरा कारी अब्दुर्रहमान कादरी ने पढ़ा। खुसूसी दुआ मुफ्ती अनवर अली ने की। 

 

Sources:JNN

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