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इंटरनेट मीडिया से हो रहे चुनाव प्रचार में ग्रामीण भारत का एक बड़ा वर्ग अछूता

जैसा कि आपको मालूम है कि कोविड-19 की गाइडलाईन को ध्यान में रखकर चुनाव आयोग ने वर्चुअल रैली और प्रचार प्रसार के निर्देश जारी किये थे। जैसा की आपको मालूम है कि इस वक्त देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैंऔर कोरोना की वजह से न तो रैलियां हो रही हैं और न ही रोड शो के जरिये राजनीतिक दल जनता के बीच अपना शक्ति प्रदर्शन ही कर पा रहे हैं।  लिहाजा सारा चुनाव प्रचार डिजिटल प्रारूप में ही सिमट कर रह गया है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की पाबंदी के कारण राजनीतिक दल और नेता इंटरनेट मीडिया के विभिन्न मंचों के जरिये जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में लगे हैं। इन्हीं मंचों पर अपनी प्रचार सामग्री को परोसकर पार्टियां चुनाव में अपनी स्थिति को मजबूत करने में जुटी हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए इस बार राजनीतिक पार्टियां लोकगीतों के रूप में अपने अपने प्रचार गीत बनवाकर  इंटरनेट मीडिया के मंचों पर उन्हें साझा करके जनता के दिलोदिमाग पर छा जाने को बेताब हैं। इस संग्राम में आगे निकल जाने की स्पर्धा लगभग सभी दलों में दिखाई दे रही है। ऐसे में यहां यह सवाल तैर रहा है कि लोकतंत्र के इस चुनावी त्योहार में क्या यह

भारी बारिश के बाद भूस्खलन से नैनीताल में नौ लोग घर में जिंदा दफन, अब तक 15 की मौत

 

 



उत्तराखंड के पहाड़ों में पिछले चौबीस घंटे से लगातार हो रही बारिश से काफी नुकसान हुआ है। नैनीताल जिले के पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण 9 मजदूरों समेत कुल 15 लोगों की मौत हो गयी है। रामगढ़ ब्लॉक के झुतिया सुनका ग्रामसभा में 9 मजदूर घर में ही जिंदा दफन हो गए। ये सभी मोटर मार्ग के निर्माण कार्य में लगे हुए थे। शाम को पास में ही एक मकान में रह रहे इन मजदूरों के ऊपर 24 घन्टे से हो रही बारिश के कारण मलबा आ गया। जिससे 9 की मौत हो गयी।जबकि एक मजदूर की हालत गंभीर बताई जा रही है। सड़क बंद होने के कारण मजदूरों के शव नहीं निकाले जा सके हैं। सभी मजदूर उत्तरप्रदेश और बिहार के रहने वाले हैं। वहीं, जिले के दोषापानी में भी भूस्खलन के कारण 3 ग्रामीणों की मौत हो गयी है। इसके अलावा मलबा आने से क्वारब में भी 2 मजदूरों की मौत हो गयी है। सभी जगह पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा राहत बचाव कार्य किया जा रहा है लेकिन खराब मौसम से काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।लोग घरों से बाहर शवो को बाहर निकालने की मशक्कत में जुटे हैं। यूपी बिहार के मजदूरो ने सोचा भी नही होगा कि रात को सोने के बाद वह मकान के मलबे में जिंदा दफन होने वाले हैं। ग्राम प्रधान सुरेश मेर ने बताया कि मकान के अंदर मलबा घुसने से 9 मजदूर जिंदा दफन हो गए हैं। वह पिछले 25 दिनों से सड़क निर्माण का कार्य कर रहे थे।

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