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लगा है आना जाना..... अब टिहरी से भाजपा विधायक धन सिंह नेगी को रास आया हाथ

देहरादून: इस बार का विधानसभा चुनाव लगता है कांग्रेस और भाजपा दोनो के लिए डू एण्ड डाई बाला बन गया है। कई दिनों से लगातार कांग्रेस से भाजपा और भजपा से कांग्रेस मे आने का दौर जारी है। खैर दल-बदल की राजनीति तो आजकल सियासत की पाठशाला का ट्रेण्ड बन गया है।  लेकिन एक बात तो गौर करने वाली है कि मौजूदा सरकार के मंत्री या विधायक पार्टी छोड़ते हैं तो जाहिर सी बात है कि एक्टिंग सरकार की वापसी दोबारा असंभव बन जाती है। आज ही कांग्रेस के दिग्गज किशोर उपाध्याय जहां भाजपा कुनबे में शामिल हो गये वहीं बड़ी खबर आ रही है कि अब टिहरी विद्यायक धन सिंह नेगी कांग्रेस में शामिल हो गये। उम्मीद की जा रही है कि वे टिहरी से कांग्रेस के प्रत्याशी हो सकते हैं। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022 जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं वैसे वैसे सियासी पारा उतार-चढ़ाव पर है। वैसे भी  उत्तराखंड का मौसम और सियासत का कुछ नहीं पता चलता कब क्या हो जाये कोई नहीं जानता। 

एलोपैथी दवाओं पर दिये बयान को लेकर हाई कोर्ट ने जारी किया योग गुरु स्वामी रामदेव को नोटिस

 

  



दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को योग गुरु स्वामी रामदेव को एलोपैथी पर उनकी टिप्पणी के लिए नोटिस जारी किया। स्वामी रामदेव ने कोविड-19 मामलों के इलाज के तरीके को लेकर डॉक्टरों की आलोचना की थी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्वामी रामदेव को एलोपैथी और एलोपैथिक डॉक्टरों के खिलाफ "गलत सूचना फैलाने" के लिए नोटिस जारी किया था। मामले की सुनवाई 10 अगस्त को होने की संभावना है।दिल्ली उच्च न्यायालय ने योग गुरु रामदेव से एलोपैथी के संबंध में दिये गए उनके बयानों के खिलाफ दाखिल याचिका पर उन्हें एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का शुक्रवार को निर्देश दिया। न्यायमूर्ति हरि शंकर ने स्पष्ट किया कि रामदेव को जवाब नहीं मिलने की स्थिति में वह इस मामले में कार्यवाही शुरू करने की अनुमति नहीं देंगे।याचिकाकर्ता चिकित्सक संघों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने तर्क दिया कि मुकदमा दायर करने की अनुमति देने के लिए, अदालत को केवल उसके समक्ष याचिका को देखना होता है और दूसरे पक्ष के जवाब की आवश्यकता नहीं होती। अदालत ने रामदेव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया और कहा, “ यदि मुकदमा शुरू करने की अनुमति दी जाती है तो (रामदेव) इसके खिलाफ याचिका दाखिल कर कर सकते हैं।हम अगले सप्ताह इसपर विचार करेंगे।  स्वामी रामदेव ने बाद में अपनी टिप्पणी का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दिए गए अपने बयान के लिए खेद जताया और उसे वापस ले लिया था। वीडियो में उन्हें कोरोनोवायरस संक्रमण के इलाज के लिए इस्तेमाल की जा रही कुछ दवाओं पर सवाल उठाते हुए कहा था कि "कोविड -19 के लिए एलोपैथिक दवाएं लेने के बाद लाखों लोग मारे गए हैं"। इस टिप्पणी का डॉक्टरों के संघों ने जोरदार विरोध किया, जिसके बाद तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने उन्हें "बेहद दुर्भाग्यपूर्ण" बताते हुए बयान को वापस लेने के लिए कहा।इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने स्वामी रामदेव पर एलोपैथी और एलोपैथिक डॉक्टरों के खिलाफ उनकी कथित टिप्पणी के लिए मानहानि का नोटिस दिया था, जिसमें उनसे 15 दिनों के भीतर माफी मांगने की मांग की गई थी, जिसमें विफल रहने पर उन्होंने कहा कि वह योग गुरु से 1,000 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग करेंगे। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की शिकायतों के बाद पटना और रायपुर में स्वामी रामदेव के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गईं।


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