यूपी में एंटी फंगल दवाओं का संकट

 

 



ब्लैक फंगस ने कानपुर समेत पूरे सूबे में लोगों की नींद उड़ा दी है। मरीजों को बचाने के लिए डॉक्टरों ने एंटी फंगल दवाएं शुरू कर दी हैं। इस बीच, अफवाहों से मांग बढ़ने के साथ ही इन दवाओं का संकट भी पैदा हो गया है। शुक्रवार को थोक बाजार की बंदी से मरीजों के तीमारदार भटकते रहे। कानपुर से इन दवाओं को लेने के लिए डॉक्टरों ने प्रयागराज और लखनऊ में टीम भेजी, लेकिन वहां भी दवाएं नहीं मिलीं। लक्षण के आधार के आधार पर हैलट में एक और चुन्नीगंज के एक निजी कोविड हॉस्पिटल में ब्लैक फंगस का एक मरीज होने की आशंका है। इनके लिए डॉक्टरों ने जब एंटी फंगस दवाओं का सुझाव दिया तो बाजार उपलब्ध ही नहीं थी। शहर ही नहीं, पूरे सूबे में अचानक वोरिकोनाडोल, थाइमोसिन अल्फा और एम्फोटेरिसिन सॉल्ट की मांग दस गुना तक बढ़ गई है।  डॉक्टरों ने दवा कारोबारियों को पांच हजार इंजेक्शन के ऑर्डर दे दिए हैं लेकिन कम्पनियों ने ऑर्डर पूरा करने में एक पखवारा तक का समय लगने के आसार बताएं हैं। इन दवाओं की पूर्व में सीमित मांग ही रही। अब इनका उत्पादन शुरू किया गया है। ब्लैक फंगस को लेकर तनाव या डरने की कोई जरूरत नहीं है। सिर्फ डॉक्टरों को डायबिटीज, कैंसर, किडनी और प्रोस्टेट मरीजों पर फोकस कर इलाज करना होगा ताकि उनमें ब्लैक फंगस की आशंका पैदा न हो। एंटी फंगल दवाओं का संकट है। ऐसे में वैकल्पिक दवाओं पर मंथन होना चाहिए। 


-डॉ. एसके कटियार, पूर्व अध्यक्ष, इंडियन चेस्ट सोसाइटी
 

एंटी फंगल सॉल्ट की दवाओं की अचानक मांग बढ़ गई है, इसलिए कम्पनियों को ऑर्डर दिए जा रहे हैं। कुछ दिनों में संकट भी खत्म हो जाएगा। डॉक्टरों की ओर से भी ऑर्डर दिए जा रहे हैं। 

-राजेन्द्र सैनी, महामंत्री, यूपी ड्रगिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन