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बगदाद : अल-रशद के शिया बहुल गांव में IS का हमला, 11 लोगों की मौत, 6 घायल

  बगदाद /   इस्लामिक स्टेट के कुछ बंदूकधारियों ने बगदाद के पूर्वोत्तर के एक गांव में हमला कर दिया, जिसमें कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई और छह अन्य घायल हुए हैं। इराक के सुरक्षा अधिकारियों ने यह जानकारी दी।  अधिकारियों ने बताया कि हमला दियाला प्रांत के बाकूबा के पूर्वोत्तर में अल-रशद के शिया बहुल गांव में हुआ। हमला क्यों किया गया यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन दो अधिकारियों ने बताया कि इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों ने पहले दो ग्रामीणों का अपहरण किया था और जब उन्हें फिरौती के पैसे नहीं दिए गए तो उन्होंने गांव पर हमला कर दिया। नाम उजागर ना करने की शर्त पर अधिकारियों ने बताया कि हमले में मशीन गन का इस्तेमाल किया गया।  हमले का शिकार बने सभी लोग आम नागरिक थे। वर्ष 2017 में देश से इस्लामिक स्टेट को खदेड़ दिए जाने के बाद से इराक में आम नागरिकों को निशाना बनाकर किए जाने वाले हमले बेहद कम हो गए हैं, हालांकि कई इलाकों में अब भी ऐसी घटनाएं देखी जा रही हैं। सुन्नी मुस्लिम चरमपंथी संगठन के आतंकवादी अब भी सक्रिय हैं, जो अक्सर सुरक्षा बलों, बिजली स्टेशनों और अन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बनाते ह

अज्ञात बदमाशों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा को उखाड़ा, 27 जनवरी से गायब था स्टैच्यू

  

वाशिंगटन / अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में एक पार्क में लगी महात्मा गांधी की प्रतिमा के साथ अज्ञात बदमाशों ने तोड़फोड़ की और उसे उखाड़ दिया। इस घटना से देश भर में भारतीय अमेरिकी लोगों में रोष है और उन्होंने अधिकारियों से इसकी जांच नस्ली घृणा अपराध मामले के तौर पर करने की मांग की है। स्थानीय समाचार पत्र ‘डेविस इंटरप्राइज’ की एक खबर में कहा गया है कि ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तर कैलिफोर्निया के डेविस शहर के सेंट्रल पार्क में लगी महात्मा गांधी की छह फुट ऊंची और 294 किलोग्राम वजन वाली प्रतिमा के घुटनों पर प्रहार किया गया। प्रतिमा का आधा चेहरा क्षतिग्रस्त है और गायब है। पुलिस ने बताया कि महात्मा गांधी की क्षतिग्रस्त प्रतिमा को सबसे पहले 27 जनवरी की सुबह पार्क के एक कर्मचारी ने देखा।डेविस शहर परिषद सदस्य लुकास फ्रेरिक्स ने बताया कि प्रतिमा को हटाया जा रहा है और इसे सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा। ‘द सेक्रामेंटो बी’ ने अपनी खबर में कहा कि जांचकर्ताओं अभी पता नहीं लगा पाए हैं कि प्रतिमा को कब तोड़ा गया और इसके पीछे कारण क्या है। समाचार पत्र ने अपनी खबर में डेविस पुलिस विभाग के उप प्रमुख पॉल डोरोशोव के हवाले से कहा,‘‘ डेविस में रहने वाले कुछ लोगों के लिए यह संस्कृतिक आइकन हैं और इसे देखते हुए हम इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं।’’ महात्मा गांधी की यह प्रतिमा भारत सरकार ने डेविस शहर को प्रदान की थी और गांधी विरोधी तथा भारत विरोधी संगठनों के विरोध प्रदर्शनों के बीच शहर परिषद ने चार वर्ष पूर्व इसे स्थापित किया था।‘ऑर्गनाइजेशन फॉर माइनॉरिटीज इन इंडिया’ (ओएफएमआई) ने प्रतिमा की स्थापना का विरोध किया था। इसके बावजूद प्रतिमा की स्थापना का निर्णय किया गया था। इसके बाद से ही ओएफएमआई ने गांधी की प्रतिमा को हटाने का अभियान चलाया हुआ था। भारतीय मूल के अमेरिकियों ने घटना पर आक्रोश व्यक्त किया है। ‘फ्रेंड्स ऑफ इंडिया सोसाइटी इंटरनेशनल’(एफआईएसआई) के गौरंग देसाई ने कहा, ‘‘ कई वर्षों से ओएफएमआई और खालिस्तानी अलगाववादियों जैसे भारत-विरोधी और हिंदू विरोधी कट्टरपंथी संगठनों द्वारा नफरत का माहौल बनाया जा रहा है।’’ अन्य संगठनों ने भी घटना की निंदा की है।

Sources:Agency News

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