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पूर्व मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद सिंह रावत नहीं लड़ेंगे चुनाव

 देहरादून : बहुत बड़ी खबर निकल कर सामने आ रही है कि उत्‍तराखंड के पूर्व मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। जानकारी के मुताबिक उन्‍होंने भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर यह इच्‍छा जाहिर की है। उन्‍होंने कहा कि धामी के नेतृत्‍व में भाजपा की सरकार बनाने के लिए काम करना चाहता हूं।  जेपी नडडा को लिखे पत्र में उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर देने के लिए आभार भी व्‍य‍क्‍त किया है। साथ ही ये भी कहा है कि प्रदेश में युवा नेतृत्‍व वाली सरकार अच्‍छा काम कर रही है। उन्‍होंने कहा, बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में मुझे चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। इसलिए मेरा अनुरोध स्‍वीकार कर लिया जाए। आपको बता दें कि त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्र में लिखा कि मान्‍यवार पार्टी ने मुझे देवभूमि उत्‍तराखंड के मुख्‍यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर दिया यह मेरा परम सौभाग्‍य था। मैंने भी कोशिश की कि पवित्रता के साथ राज्‍य वासियों की एकभाव से सेवा करुं व पार्टी के संतुलित विकास की अवधारणा को पुष्‍ट करूं। प्रधानमंत्री जी का भरपूर सहयोग व आशीर्वाद मु

अनिल देशमुख के खिलाफ ED ने पूरक आरोपपत्र किया दाखिल

 


मुंबई /  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को धनशोधन के एक मामले में महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया। जांच एजेंसी ने यहां धनशोधन निषेध अधिनियम (पीएमएलए) से संबंधित मामलों की सुनवाई से जुड़ी एक विशेष अदालत के समक्ष 7,000 पन्नों का आरोपपत्र दायर किया, जिसमें देशमुख के बेटों को भी आरोपी बनाया गया है। ईडी ने इससे पहले देशमुख के निजी सचिव (अतिरिक्त जिलाधिकारी स्तर के अधिकारी) संजीव पलांदे और निजी सहायक कुंदन शिंदे समेत 14 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।

ईडी ने देशमुख को इस साल एक नवंबर को संबंधित मामले में गिरफ्तार किया था और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा इस साल 21 अप्रैल को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता के खिलाफ भ्रष्टाचार और आधिकारिक पद के दुरुपयोग के आरोप में प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद ईडी ने देशमुख और उनके सहयोगियों के खिलाफ जांच शुरू की थी। ईडी का मामला यह है कि राज्य के गृह मंत्री के रूप में देशमुख ने कथित तौर पर अपने पद का दुरुपयोग किया और पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के माध्यम से मुंबई के कई बार से 4.70 करोड़ रुपये की वसूली की थी। वाजे को ‘एंटीलिया’ बम और मनसुख हिरन की हत्या के मामलों में गिरफ्तारी के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। धनशोधन का यह मामला देशमुख परिवार के नियंत्रण वाले शैक्षणिक ट्रस्टनागपुर स्थित श्री साईं शिक्षण संस्थान से संबंधित है। धनशोधन रोधी एजेंसी के अनुसार, पलांदे और शिंदे दोनों ने बेहिसाबी धन के प्रसार और शोधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस साल की शुरुआत में राज्य के गृह मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले देशमुख ने अपने खिलाफ लगे आरोपों से बार-बार इनकार किया है।

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