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इंटरनेट मीडिया से हो रहे चुनाव प्रचार में ग्रामीण भारत का एक बड़ा वर्ग अछूता

जैसा कि आपको मालूम है कि कोविड-19 की गाइडलाईन को ध्यान में रखकर चुनाव आयोग ने वर्चुअल रैली और प्रचार प्रसार के निर्देश जारी किये थे। जैसा की आपको मालूम है कि इस वक्त देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैंऔर कोरोना की वजह से न तो रैलियां हो रही हैं और न ही रोड शो के जरिये राजनीतिक दल जनता के बीच अपना शक्ति प्रदर्शन ही कर पा रहे हैं।  लिहाजा सारा चुनाव प्रचार डिजिटल प्रारूप में ही सिमट कर रह गया है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की पाबंदी के कारण राजनीतिक दल और नेता इंटरनेट मीडिया के विभिन्न मंचों के जरिये जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में लगे हैं। इन्हीं मंचों पर अपनी प्रचार सामग्री को परोसकर पार्टियां चुनाव में अपनी स्थिति को मजबूत करने में जुटी हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए इस बार राजनीतिक पार्टियां लोकगीतों के रूप में अपने अपने प्रचार गीत बनवाकर  इंटरनेट मीडिया के मंचों पर उन्हें साझा करके जनता के दिलोदिमाग पर छा जाने को बेताब हैं। इस संग्राम में आगे निकल जाने की स्पर्धा लगभग सभी दलों में दिखाई दे रही है। ऐसे में यहां यह सवाल तैर रहा है कि लोकतंत्र के इस चुनावी त्योहार में क्या यह

पंजाब में चुनाव लड़ेंगे किसान संगठन के नेता! बलबीर राजेवाल

  


पंजाब की राजनीति दिलचस्प हो गई है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर एक और फ्रंट यहां तैयार हो गया है। मिल रही जानकारी के मुताबिक 22 से ज्यादा किसान संगठनों ने बलबीर सिंह राजेवाल को यूनाइटेड फ्रंट का सीएम चेहरा घोषित कर दिया है। हालांकि बलबीर राज्यपाल की ओर से फिलहाल इस पर कोई स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। लेकिन ज्यादातर किसान संगठन चुनाव में उतरने के पक्ष में है। किसानों के चुनावी मैदान में उतरने के बाद सत्तारूढ़ कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दलों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। साल भर दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन करने के बाद लौटे किसान संगठनों ने चुनावी तैयारी पूरी कर ली है। जानकारी यह भी है कि किसान संगठनों का यह फ्रंट आम आदमी पार्टी से भी गठबंधन कर सकता है। किसान संगठन 30 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकता है और आम आदमी की सरकार बनने की स्थिति में डिप्टी सीएम का फार्मूला भी तय किया जा सकता है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों का विरोध प्रदर्शन दिल्ली के अलग-अलग सीमाओं पर लगभग 1 साल तक चला। इसमें पंजाब के किसानों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई।किसान आंदोलन के दौरान बलबीर सिंह राजेवाल एक बड़ा चेहरा बन कर उभरे। बलबीर सिंह उन किसान नेताओं में भी शामिल रहे जो आंदोलन को गैर सियासी और गैर धार्मिक बनाने की वकालत कर रहे थे। बलबीर सिंह राजेवाल भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक नेताओं में से हैं। खन्ना और समराला में उनका अपना दबदबा है। बलवीर सिंह की उम्र 77 वर्ष है और वह 12वीं पास हैं।


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