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इंटरनेट मीडिया से हो रहे चुनाव प्रचार में ग्रामीण भारत का एक बड़ा वर्ग अछूता

जैसा कि आपको मालूम है कि कोविड-19 की गाइडलाईन को ध्यान में रखकर चुनाव आयोग ने वर्चुअल रैली और प्रचार प्रसार के निर्देश जारी किये थे। जैसा की आपको मालूम है कि इस वक्त देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैंऔर कोरोना की वजह से न तो रैलियां हो रही हैं और न ही रोड शो के जरिये राजनीतिक दल जनता के बीच अपना शक्ति प्रदर्शन ही कर पा रहे हैं।  लिहाजा सारा चुनाव प्रचार डिजिटल प्रारूप में ही सिमट कर रह गया है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की पाबंदी के कारण राजनीतिक दल और नेता इंटरनेट मीडिया के विभिन्न मंचों के जरिये जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में लगे हैं। इन्हीं मंचों पर अपनी प्रचार सामग्री को परोसकर पार्टियां चुनाव में अपनी स्थिति को मजबूत करने में जुटी हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए इस बार राजनीतिक पार्टियां लोकगीतों के रूप में अपने अपने प्रचार गीत बनवाकर  इंटरनेट मीडिया के मंचों पर उन्हें साझा करके जनता के दिलोदिमाग पर छा जाने को बेताब हैं। इस संग्राम में आगे निकल जाने की स्पर्धा लगभग सभी दलों में दिखाई दे रही है। ऐसे में यहां यह सवाल तैर रहा है कि लोकतंत्र के इस चुनावी त्योहार में क्या यह

कोलकाता नगर निगम के मेयर होंगे फिरहाद हकीम

 


 पश्चिम बंगाल के मंत्री फरहाद हकीम को कोलकाता का महापौर बनाया गया है जबकि सांसद माला रॉय कोलकाता नगर निगम के अध्यक्ष होंगी। इस अवसर पर ममता बनर्जी ने निर्वाचित पार्षदों के साथ बैठक भी की। भाजपा और सीपीएम पर हमला करते हुए ममता बनर्जी ने निर्वाचित पार्षदों से कहा कि बीजेपी और सीपीएम को बात ज्यादा करने और काम कम करने की आदत है। सभी होर्डिंग्स को हटाने की जरूरत है और शहर साफ-सुथरा होना चाहिए। यूनेस्को से मान्यता मिलने के बाद दुर्गा पूजा शुरू होने से 10 दिन पहले समारोह शुरू हो जाएगा।

इसके साथ ही ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य चुनाव आयोग और पुलिस ने शांतिपूर्ण चुनाव कराने में अच्छा काम किया। कोलकाता कॉर्प के रिपोर्ट कार्ड की हर 6 महीने बाद समीक्षा की जाएगी। अगर कोई काम नहीं कर रहा है, तो सरकार उसके खिलाफ कार्रवाई करेगी। आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस ने कोलकाता नगर निगम के चुनाव में भी शानदार विजय हासिल की है और तीसरी बार सत्ता पर कब्जा कर लिया है। कोलकाता नगर निगम चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को करीब 72 फ़ीसदी वोट मिले हैं। अधिकारियों ने बताया कि ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी ने निगम की 144 सीटों में से 134 पर जीत हासिल की है। वहीं भाजपा, वाम मोर्चा और कांग्रेस राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी को चुनौती नहीं दे सकी। विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। राज्य चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, भाजपा महज़ तीन वार्ड में जीत दर्ज कर सकी। कांग्रेस और माकपा नीत वाम मोर्चे की झोली में भी दो-दो सीटें आई हैं। वहीं तीन निर्दलीयों ने फतह हासिल की है। वाम मोर्चा मत प्रतिशत के मामले में दूसरे स्थान पर रहा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी अपनी पार्टी का विस्तार दूसरे राज्यों में करने की कोशिश में हैं। 

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