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पूर्व मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद सिंह रावत नहीं लड़ेंगे चुनाव

 देहरादून : बहुत बड़ी खबर निकल कर सामने आ रही है कि उत्‍तराखंड के पूर्व मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। जानकारी के मुताबिक उन्‍होंने भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर यह इच्‍छा जाहिर की है। उन्‍होंने कहा कि धामी के नेतृत्‍व में भाजपा की सरकार बनाने के लिए काम करना चाहता हूं।  जेपी नडडा को लिखे पत्र में उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर देने के लिए आभार भी व्‍य‍क्‍त किया है। साथ ही ये भी कहा है कि प्रदेश में युवा नेतृत्‍व वाली सरकार अच्‍छा काम कर रही है। उन्‍होंने कहा, बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में मुझे चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। इसलिए मेरा अनुरोध स्‍वीकार कर लिया जाए। आपको बता दें कि त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्र में लिखा कि मान्‍यवार पार्टी ने मुझे देवभूमि उत्‍तराखंड के मुख्‍यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर दिया यह मेरा परम सौभाग्‍य था। मैंने भी कोशिश की कि पवित्रता के साथ राज्‍य वासियों की एकभाव से सेवा करुं व पार्टी के संतुलित विकास की अवधारणा को पुष्‍ट करूं। प्रधानमंत्री जी का भरपूर सहयोग व आशीर्वाद मु

पाकिस्तान: कोट लखपत जेल से रिहा होकर 29 साल बाद लौटे कुलदीप, गले लगाने को मां बेताब

 


29 साल पहले घर से लापता हुआ कुलदीप करीब तीन दशक के इंतजार के बाद पाकिस्तान से स्वदेश लौटा है। हालांकि, कुलदीप का अभी घरवालों से मिलना बाकी है। वे भी उस समय का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं जब वे उसे छू सकें और उसे गले लगा सकें। इतने दिनों में कुलदीप की मां ने बेटे का चेहरा देखने की उम्मीदों को टूटने नहीं दिया। कुलदीप के वाघा बॉर्डर से भारत के प्रवेश के साथ ही मां की आंखों से खुशी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। वह अपने बेटे को गले लगाने के लिए उत्सुक है। 10 दिसंबर 1992 को रामकोट के मकवाल निवासी कुलदीप सिंह अचानक लापता हो गया। कई दिनों तक जब कुलदीप नहीं लौटा तो परिजन भी कई जगह पूछताछ करने लगे। जहां भी किसी ने उसके देखने की सूचना दी, घरवाले वहां पहुंच जाते, लेकिन कुलदीप की जानकारी नहीं मिली। जब कुलदीप का 1996 में पहला मैसेज मिला तो परिवार की बिखरी उम्मीदें फिर से जीवित हो उठीं। मकवाल निवासी कुलदीप सिंह पाकिस्तान की कोट लखपत सेंट्रल जेल लाहौर के बैरक नंबर चार में बंद था। यही वह पता था जहां से परिवार को उसके बाद कुलदीप सिंह की जानकारी मिलती रही कुलदीप से मिलने की उम्मीद में पिछले 29 सालों में मां की आंखें तरस गई हैं। इन आंखों से अब खुशी के आंसू बह रहे हैं। कुलदीप सिंह की मां कृष्णा देवी का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि सांस लेने से पहले वह अपने बेटे से मिल पाएंगी। मां ने कहा कि उनका बेटा बेहद साहसी है। वह नहीं जानता कि वह पाकिस्तान कैसे पहुंचा, लेकिन उसे उम्मीद थी कि उसका बेटा एक दिन लौट आएगा। तीन दशक बाद ही सही भगवान ने उनकी प्रार्थना सुनी है।कुलदीप के तीन दशक बाद घर लौटने से उसे आशियानें में उत्सव का माहौल है। कुलदीप की 50 वर्षीय पत्नी उर्मिला की तो खुशी का ठिकाना नहीं है और पति के वापस लौटने पर वो दुल्हन की तरह संजने की तैयारी कर रही है। बता दें कि जब कुलदीप को पाकिस्तान में पकड़ा गया था तो उसकी उम्र महन 24 साल जबकि उसकी पत्नी उर्मिला की उम्र 21 साल थी। उस वक्त उसका एक बेटा केवल तीन माह का था जो बढ़ते वक्त के साथ 29 बरस का हो गया।  



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