सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Featured Post

इंटरनेट मीडिया से हो रहे चुनाव प्रचार में ग्रामीण भारत का एक बड़ा वर्ग अछूता

जैसा कि आपको मालूम है कि कोविड-19 की गाइडलाईन को ध्यान में रखकर चुनाव आयोग ने वर्चुअल रैली और प्रचार प्रसार के निर्देश जारी किये थे। जैसा की आपको मालूम है कि इस वक्त देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैंऔर कोरोना की वजह से न तो रैलियां हो रही हैं और न ही रोड शो के जरिये राजनीतिक दल जनता के बीच अपना शक्ति प्रदर्शन ही कर पा रहे हैं।  लिहाजा सारा चुनाव प्रचार डिजिटल प्रारूप में ही सिमट कर रह गया है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की पाबंदी के कारण राजनीतिक दल और नेता इंटरनेट मीडिया के विभिन्न मंचों के जरिये जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में लगे हैं। इन्हीं मंचों पर अपनी प्रचार सामग्री को परोसकर पार्टियां चुनाव में अपनी स्थिति को मजबूत करने में जुटी हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए इस बार राजनीतिक पार्टियां लोकगीतों के रूप में अपने अपने प्रचार गीत बनवाकर  इंटरनेट मीडिया के मंचों पर उन्हें साझा करके जनता के दिलोदिमाग पर छा जाने को बेताब हैं। इस संग्राम में आगे निकल जाने की स्पर्धा लगभग सभी दलों में दिखाई दे रही है। ऐसे में यहां यह सवाल तैर रहा है कि लोकतंत्र के इस चुनावी त्योहार में क्या यह

बिहार : सोने-चांदी में खेल रहे हैं बिहार के अफसर, अवैध कमाई का जरिया बना बालू और शराब


 

हमारे देश में भ्रष्टाचार पर कितना लगाम कसी गई है इसका पता तो बिहार में अफसरों के घरों पर पड़ रहे  छापों से ही पता लगता है। सोने.चांदी की ईंटें, नकदी और प्रॉपर्टी कागजात के ढेर भ्रष्टाचार की असलियत बताते हैं। वैसे तो बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ सुशासन बाबू की सरकार और उनकी जीरो टॉलरेंस नीति के बावजूद महकमों के बहुत से बाबुओं से लेकर आईपीएस अफसरों तक ने अपनी आमदनी में चक्रवृद्वि इजाफा करकेअकूत संपत्ति अर्जित की है।सरकारी एजेंसियों द्वारा की जा रही ताबड़तोड़ कार्रवाई में भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे सरकारी अधिकारियों के पास अकूत संपत्ति का पता चल रहा है। किसी के घर से सोने-चांदी की ईंटें मिल रही हैं तो कहीं से करोड़ों की नकदी। मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर, (एमवीआई) से लेकर डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्टऑफिसर तक, सर्किल आफिसर से लेकर कार्यपालक अभियंता,तक सिपाही से लेकर पुलिस अधीक्षक तक तथा सब रजिस्ट्रार से लेकर वाइस चांसलर तक हर स्तर के अधिकारी और कर्मचारी कार्रवाई की जद में लपेटे गये हैं। सिर्फ दिसंबर माह में की गई कार्रवाई में भ्रष्टाचारियों के कब्जे से चार करोड़ रुपये से अधिक की केवल नकदी बरामद की गई है।ये ही वजह रही कि राज्य सरकार की तीन एजेंसियां आर्थिक अपराध इकाई,स्पेशल विजिलेंस यूनिट,तथा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो  ने विभिन्न स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं या शिकायतों के आधार पर भ्रष्ट अधिकारियों.कर्मचारियों के खिलाफ डंडा चलाया है। रेड में बरामद सामान तथा निवेश का पता चलने पर एकबारगी यह अनुमान करना कठिन हो जाता है कि आखिर किस हद तक ये भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। इन एजेंसियों ने बीते छह माह में करीब 30 अफसरों के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी कर 600 करोड़ से अधिक की काली कमाई को पकड़ा है।

टिप्पणियाँ

Popular Post