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नए वेरिएंट फैलने की आशंका : आश्रमों और गेस्ट हाउस में भी देना होगा अब कोरोना जांच का प्रमाणपत्र

  मथुरा / उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में वृन्दावन शहर में दस विदेशी एवं एक देशी नागरिक के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी गेस्ट हाउसों एवं आश्रमों को कहा है कि वे अपने आने वाले हर देशी-विदेशी मेहमान का पूरा ब्योरा रखें और उनके पास कोरोना जांच का नेगेटिव प्रमाण पत्र होने के बाद ही उन्हें अपने यहां ठहराएं। गौरतलब है कि लंबे समय तक कोरोना वायरस का मामला नहीं आने के बाद बरती गई लापरवाही के बाद अब फिर से कोरोना संक्रमितों के मिलने का सिलसिला चल पड़ा है। वृन्दावन में पिछले सप्ताह से अब तक दस विदेशी एवं एक उड़ीसा की भारतीय नागरिक संक्रमित पाई जा चुकी है। तीन विदेशी जिला स्तर पर कोई सूचना दिए बिना यहां से लौट भी चुके हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रचना गुप्ता ने कहा है कि गेस्ट हाउस एवं आश्रम बाहर से आने वाले व्यक्तियों के रुकने से पूर्व उनके कोविड वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र एवं कोविड-19 जांच रिपोर्ट प्राप्त कर ही उन्हें ठहराएं तथा ऐसा नहीं होने पर वे तत्काल स्वास्थ्य विभाग के नियंत्रण कक्ष को रिपोर्ट करें। उनके अनुसार नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। न

देवास्थनम बोर्ड को लेकर तीर्थ पुरोहितों में रोष,केदारनाथ पहुंचे पूर्व सीएम त्रिवेंद्र को रोका,गंगोत्री बंद

 

 


देवस्थानम बोर्ड भंग नहीं होने से केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के तीर्थ पुरोहितों में रोष है। इसी क्रम में सोमवार को केदारनाथ पहुंचे पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का तीर्थ पुरोहित समाज ने विरोध किया।त्रिवेंद्र सिंह रावत को संगम स्थित पुल से आगे नहीं जाने दिया गया। तीर्थपुरोहित एवं हक-हकूकधारियों ने इस दौरान खूब नारेबाजी की और उनका जमकर विरोध किया। जिसके बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत जीएमवीएन गेस्ट हाउस में चले गए। खास बात ये रही कि सोमवार को ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक व कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत भी केदारनाथ धाम पहुंचे थे। उन्हें भी तीर्थ पुरोहितों का विरोध झेलना पड़ा, हालांकि उन्होंने धाम में दर्शन किए।

चारधाम देवस्थानम बोर्ड: हक-हकूकधारी और तीर्थपुरोहितों ने भरी हुंकार, तीन नवंबर को केदारनाथ कूच का एलानवहीं उत्तराखंड सरकार के आश्वासन के बाद भी देवस्थानम बोर्ड व एक्ट वापस नहीं होने पर तीर्थ पुरोहितों ने सोमवार को गंगोत्री बंद रखने का निर्णय लिया है। विरोध स्वरूप गंगोत्री में बाजार बंद है। धाम में भी पूजा सामग्री सहित अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद हैं। वहीं इस दौरान तीर्थ पुरोहितों नारेबाजी करते हुए रैली भी निकाली।गंगोत्री धाम में नियमित पूजा-पाठ और दर्शन सामान्य दिनों की तरह ही हो रहे हैं। केवल भागीरथी घाट पर पूजा संपन्न कराने वाले पुरोहितों ने विरोध स्वरूप पूजा बंद की हुई है। पूजा प्रसाद की दुकानें बंद होने से तीर्थयात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

रविवार को श्री पांच गंगोत्री मंदिर समिति से जुड़े तीर्थ पुरोहितों व हक हकूकधारियों ने बैठक कर देवस्थानम बोर्ड व एक्ट के मुद्दे पर चर्चा की। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि 11 सितंबर को सीएम के साथ हुई वार्ता में 30 अक्तूबर तक देवस्थानम बोर्ड भंग कर करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक सरकार ने इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है।बैठक में सभी ने सोमवार को गंगोत्री धाम में व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद करने, भागीरथी घाट पर होने वाले पूजा पाठ कार्य बंद रखने व रैली निकालने का निर्णय लिया था। इस दौरान सह सचिव राजेश सेमवाल, इंद्रदेव सेमवाल, संजय सेमवाल, गणेश सेमवाल, कमलनयन सेमवाल, आशाराम सेमवाल, अंबरीश सेमवाल, माधव सेमवाल, बद्रीप्रसाद सेमवाल आदि शामिल थे। वहीं देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर चारधाम तीर्थ पुरोहित हक-हकूकधारी महापंचायत समिति ने सभी तीर्थपुरोहित व हक-हकूकधारियों से आगामी तीन नवंबर को केदारनाथ कूच का आह्वान किया है। उन्होंने प्रदेश सरकार पर मांग को अनसुना करने का आरोप भी लगाया है।



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