अमेरिका को तालिबान की धमकी : 31अगस्त के बाद सेना को अफगानिस्तान में रुकना पड़ेगा भारी

 


 

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद वहाँ की सुरक्षा स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, सभी देश अपने नागरिकों को वहां से निकालने का प्रयास कर रहें हैं। इन सब के बीच भारत तीन उड़ानों के जरिए रविवार को दो अफगान सांसदों समेत 392 लोगों को देश वापस ले आया। वहीं दूसरी तरफ तालिबान की ओर से अमेरिका को धमकी दी गई है कि अमेरिका अपनी फौज को 31 अगस्त तक हटाए नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद काबुल में खराब होती सुरक्षा स्थिति की पृष्ठभूमि में भारत अफगान राजधानी से अपने नागरिकों को बाहर निकालने के अपने प्रयासों के तहत तीन उड़ानों के जरिए दो अफगान सांसदों समेत 392 लोगों को रविवार को देश वापस ले आया। इस बीच कतर में भारतीय दूतावास ने आज शाम कहा कि 146 भारतीय नागरिक, जिन्हें अफगानिस्तान से निकालकर दोहा ले जाया गया था, उन्हें रविवार रात भारत वापस लाया जा रहा है। भारतीय वायुसेना के सी-17 सैन्य परिवहन विमान के जरिए 107 भारतीयों और 23 अफगान सिखों एवं हिंदुओं समेत कुल 168 लोगों को सुबह काबुल से दिल्ली के निकट हिंडन वायुसेना अड्डे पर लाया गया। अधिकारियों ने बताया कि 87 भारतीयों और दो नेपाली नागरिकों के एक अन्य समूह को दुशाम्बे से एअर इंडिया के एक विशेष विमान से वापस लाया गया।अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद वहां पैदा हुए संकट के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने युद्धग्रस्त देश से अपने बलों की वापसी के कदम को सही ठहराते हुए कहा कि इतिहास में यह कदम ‘‘तार्किक और उचित निर्णय’’ के रूप के दर्ज किया जाएगा। अफगानिस्तान से अमेरिकी बलों की वापसी के फैसले के कारण बाइडन प्रशासन की आलोचना हो रही है, क्योंकि बलों के लौटने के कारण तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है, जिसके कारण देश में अराजकता फैल गई है।


संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तान के काबुल से 120 लोगों को कजाखस्तान के अल्माटी पहुंचाया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बताया कि बीते हफ्ते में यह इस तरह की दूसरी उड़ान थी। दुजारिक ने रविवार को संवाददाताओं को सूचित किया कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और अफगानिस्तान में संरा के सहयोगियों के रूप मे काम करने वाले कई गैर-सरकारी संगठनों के सदस्यों समेत 120 लोगों को काबुल से निकाला गया। उन्होंने बताया कि संरा ने इन लोगों को 22 अगस्त को काबुल से अल्माटी पहुंचाया गया था। इसके कुछ दिन पहले संरा ने अपने 100 जवानों को काबुल में ‘सुरक्षा एवं अन्य अवरोधकों’ के मद्देनजर अफगानिस्तान से कजाखस्तान भेजा था।


जर्मनी की सेना ने कहा कि सोमवार को काबुल हवाईअड्डे के उत्तरी द्वार पर अफगानिस्तान के सुरक्षा बलों और अज्ञात हमलावरों के बीच गोलीबारी हुई है जिसमें एक अफगान सुरक्षा अधिकारी की मौत हो गई। सेना ने ट्वीट करके बताया कि सोमवार को तड़के हुई इस मुठभेड़ में अफगानिस्तान के एक सुरक्षा अधिकारी की मौत हो गई है जबकि तीन अन्य घायल हो गए हैं। उसने बताया कि इस संघर्ष में अमेरिका और जर्मनी के बल भी शामिल हो गए, जर्मनी का कोई सैनिक घायल नहीं हुआ है। अभी इस बारे में कोई सूचना नहीं है कि हमलावर कौन थे।


अफगानिस्तान के अधिकतर प्रांतों पर तालिबान का कब्जा है। राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर सयुक्त अरब अमीरात (यूएई) चले गए हैं। इसी बीच तालिबान ने अमेरिका को धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका अपनी फौज को 31 अगस्त तक हटाए नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे।