कहीं फर्जी वेबसाइट पर तो नहीं भर रहे ड्राइविंग लाइसेंस फीस








 

















ड्राइविंग लाइसेंस आवेदन के लिए फर्जी वेबसाइट बनाने का मामला सामने आया है। वेबसाइट पर ड्राइविंग लाइसेंस आवेदन के पैसे वसूले जा रहे हैं। निजी सचिव उत्तराखंड शासन के आदेश पर आरटीओ ने एआरटीओ (प्रशासन) को वेबसाइट संचालक पर एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश दिए हैं।


आरटीओ दिनेश पठोई ने बताया कि अनीश्वा वर्धन पुत्र आनंद वर्धन ने 20 नवंबर को ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया। फोन-पे के माध्यम से क्यूआर कोड स्कैन करके 1375 रुपये जमा करवाए।


वेबसाइट पर उनके द्वारा आधार कार्ड समेत अन्य कागज भी फोटो कॉपी भी अपलोड की गई, लेकिन जब ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट की तिथि नहीं मिली तो उन्होंने परिवहन विभाग कार्यालय से संपर्क किया।


उनको बताया गया कि आरटीओ में उनकी कोई फीस जमा नहीं हुई है। आरटीओ ने बताया कि यह इससे प्रतीत होता है कि कोई व्यक्ति फर्जी वेबसाइट बनाकर डीएल आवेदन के नाम पर लोगों से पैसे वसूल रहा है।


आरटीओ ने एआरटीओ (प्रशासन) द्वारिका प्रसाद को पत्र लिखकर फर्जी वेबसाइट संचालक के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।


परिवहन की आधिकारिक साइट पर करें आवेदन 
आरटीओ दिनेश पठोई ने बताया कि ड्राइविंग लाइसेंस या अन्य कार्यों की प्रक्रिया ऑनलाइन है। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.parivahan.gov.in पर आवेदन करें।


इसमें ड्राइविंग लाइसेंस रिलेटेड सर्विस या व्हीकल रजिस्ट्रेशन रिलेटेड सर्विस के ऑप्शन में क्लिक कर सेवा चुनें। साइबर ठगों से बचने के लिए सावधानी बरतें। फीस जमा करने से पहले यह पुख्ता कर लें कि यह परिवहन विभाग की ही बेवसाइट है।


बताया कि लर्निंग लाइसेंस छह माह के लिए वैद्य होता है। इसे एक महीने बाद कभी भी परमानेंट करवाया जा सकता है। परमानेंट लाइसेंस के लिए भी आधिकारिक वेबसाइट में जाकर ही आवेदन करना होता है।


इन बातों रखें ध्यान
-वेबसाइट पर एसएसएल सिक्योरिटी होनी चाहिए। यानी वेबसाइट के यूआरएल के आगे लॉक का निशान बना हो या ँ३३स्र२ से शुरू होती हो।
-किसी वेबसाइट को खोलने से पहले उस पर लिखे गए टेक्स्ट की स्पेलिंग चेक करें। आमतौर पर फर्जी साइट पर शब्दों की स्पेलिंग गलत या थोड़ी हेरफेर वाली होती है। 
-वेबसाइट के कंटेंट, उसकी प्राइवेट पॉलिसी, अबाउट, टीम इन्फो, फोन, ईमेल और गूगल लिस्टिंग को चेक करें। ये सब जानकारियां अगर उपलब्ध नहीं हैं, तो समझ लें कि वेबसाइट सही नहीं है।
-आपके ईमेल, एसएमएस या सोशल मीडिया मैसेंजर पर आने वाले लिंक का इस्तेमाल पेमेंट के लिए ना करें। अगर आपने ऐसा किया तो आप फर्जी वेबसाइट के चंगुल में फंस गए।  


 


Sources:HindustanSamachar