जम्मू-कश्मीर-25 हजार करोड़ रुपए का रोशनी भूमि घोटाला,कई नेताओं और अफसरों के नाम हुए शामिल


रोशनी जमीन घोटाला मामले में सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है। मामले में कई अधिकारियों को आरोपित बनाया गया है। इस घोटाले में कई पूर्व मंत्री, अधिकारियों इत्यादि के नाम सामने आए हैं।



जम्मू-कश्मीर के इतिहास के सबसे बड़े भूमि घोटाले की अब परते खुलने लगी हैं। बता दें कि 25 हजार करोड़ रुपए के रोशनी जमीन घोटाले में अब एक बड़ा खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस भूमि घोटाले में कई राजनीतिक दलों के नेताओं और नौकरशाहों के नाम शामिल होने की बातें कही जा रही हैं। कहा जा रहा है कि पिछले कई सालों से गरीबों के घरों को रोशन करने के नाम पर नेता और अधिकारी करोड़ों रुपए की जमीन को हड़प रहे हैं। इसी संबंध में उन नेताओं की पहली सूची सामने आई है जिन्होंने सरकारी जमीन को अपने रिश्तेदारों, भाई-बंधुओं और परिवार की संपत्ति में तब्दील कर दिया है।


 



 


इसमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री हसीब द्राबू का नाम शामिल है। इसके अतिरिक्त कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के पूर्व मंत्रियों, अधिकारियों, व्यापारियों और करीबी रिश्तेदारों के भी नाम शामिल हैं। बताया जा रहा है कि अभी तो महज एक सूची सार्वजनिक हुई है। आगे और भी सूचिओं के सामने आने की संभावना जताई जा रही है। इस घोटाले में ऐसे समय में अहम सुराग सामने आया है जब घाटी में जिला विकास परिषद (डीडीसी) के चुनाव होने वाले हैं। 


सीबीआई कर रही जांच


रोशनी जमीन घोटाला मामले में सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है। मामले में कई अधिकारियों को आरोपित बनाया गया है। इस घोटाले में कई पूर्व मंत्री, अधिकारियों इत्यादि के नाम सामने आए हैं। इन तमाम लोगों ने रोशनी एक्ट के इस्तेमाल कर सरकारी जमीन को अवैध तरीके से अपने रिश्तेदारों, भाई-बंधुओं और परिवार के लोगों के नाम ट्रांसफर करा दिया था।


 


आपको बता दें कि इस मामले की जांच जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने ही सीबीआई को सौंपी थी। हाई कोर्ट ने रोशनी एक्ट को असंवैधानिक बताते हुए इसके तहत आवंटित की गई भूमि के नामांतरण रद्द करने का आदेश सुनाया था और छह माह में भूमि वापस लेने का भी आदेश था। 


सामने आए यह नाम


इस घोटाले में पीडीपी नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री हसीब द्राबू के शामिल होने की खबरें हैं। इसके अतिरिक्त हसीब द्राबू की मां शहजादा भानो, भाई एजाज का नाम भी सामने आया है। वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि इन लोगों ने अपने-अपने रिश्तेदारों के नाम भी जमीन हड़प ली।


 


जांच में पीडीपी नेता के अलावा केके अमला और मोहम्मद शफी पंडित का भी नाम सामने आया हैं। केके अमला के श्रीनगर में कई होटला हैं जबकि मोहम्मद शफी मुख्य सचिव रैंक के अधिकारी रह चुके हैं। इन लोगों ने भी अपने और अपने रिश्तेदारों के नाम पर जमीन आवंटित कराई थी। 


क्या है रोशनी एक्ट ?


साल 2001 में, तब की फारूक अब्दुल्ला सरकार ने जम्मू-कश्मीर राज्य भूमि (व्यवसायियों का स्वामित्व का मामला) एक्ट 2001 पारित किया था, जिसे रोशनी एक्ट के नाम से भी जाना जाता है। इस एक्ट के तहत 1990 तक अनाधिकृत तौर पर प्रदेश की भूमि पर कब्जा जारी रखने वाले व्यक्तियों को मालिकाना हक दिया जाए। सरकार का कहना था कि इसका सीधा फायदा उन किसानों को मिलेगा जो सरकारी जमीन पर कई सालों से खेती कर रहे है लेकिन नेताओं ने जमीनों पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया। फिर 2005 में तब की महबूबा मुफ्ती सरकार ने 2004 के कट ऑफ में और भी ज्यादा छूट दे दी और फिर गुलाम नबी आजाद ने भी कट ऑफ ईयर को साल 2007 तक के लिए सीमित कर दिया था।


 


Sources:Prabhashakshi Samachar