सोशल डिस्टेंसिंग के बीच बिराजे गजानन, घरों व मंदिरों में पूजा शुरू


फर्रुखाबाद / गणेश चतुर्थी पर इस बार प्रतिवर्ष होने वाला हंगामा नहीं दिखाई दिया। मंदिरों व घरों में सोशल डिस्टेंसिंग के बीच भगवान गजानन विराजे। भक्तों ने आरती उतारी और प्रथम पूज्य देव गणेश से कोरोना जैसे संकट से विश्व को मुक्ति दिलाने की प्रार्थनाएं कीं। इस बार गणेश उत्सव महज औपचारिकता बनता हुआ दिखाई दे रहा है। 


महाराष्ट्र में होने वाले गणेश पूजन की तर्ज पर जिले में पिछले करीब दो दशक से गणेश पूजन की शुरूआत हुई। तबसे लेकर अब तक लगातार गणेश पूजा का क्रेज बढ़ता ही चला गया। जिले में हजारों स्थानों पर भगवान गणेश की स्थापना की जाती है। सुबह-शाम आस-पास क्षेत्र के नागरिक गणेश जी की आरती करके उनका प्रसाद ग्रहण करते हैं। कहीं पर सात दिन कहीं पर ग्यारह दिन तो कहीं पर चैदह दिन तक के लिए मूर्ति की स्थापना की जाती है और इन दिनों में सुबह-शाम आरती-पूजा होने से वातावरण गणेशमय दिखाई देता है लेकिन इस बार वैश्विक महामारी कोविड-19 के चलते उत्सव में भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना किया जाना प्रतिबंधित किया गया है। इस कारण से गणेश उत्सव की धूम सुबह से नहीं दिखाई दी। हालांकि मंदिरों में मुख्य गेट बंद करके स्थापित मूर्तियों की छोटे गेट से जाकर पूजा करने की अनुमति पुजारियों द्वारा दी गई। लोगांे ने स्वयं ही कोरोना के चलते भीड़ पर नियंत्रण रखने का शायद संकल्प लिया है तभी गणेश पूजा के लिए मंदिरों में भीड़ नहीं दिखाई दी बल्कि एक-एक करके भक्तजन भगवान गणेश के दरबार में आये और माथा टेका। 


नगर के मित्तूकूंचा स्थित मानस मंदिर में स्थापित गणेश प्रतिमा का श्रृंगार किया गया। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सभासद अतुल शंकर दुबे ने सप्तनीक मौजूद रहकर आरती उतारी व हवन-पूजन कराया। मुख्य पुजारी अवधेश बाजपेयी ने हवन किया। वहीं ऐतिहासिक पण्डाबाग मंदिर में पीतल की गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई। वहां पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए भक्तों ने पूजा की। इसी तरह से नगर के मुख्य मंदिरों में भगवान गजानन विराजे मगर कोरोना के कारण लगे प्रतिबंध के चलते हो-हल्ला नहीं हुआ और एक-एक करके भक्त पूजा करते रहे। वहीं दूसरी तरफ गंगा तट पर भी भगवान गजानन का स्मरण करके भक्तों ने गंगा स्नान किया एवं सभी के मंगल की कामना की। 


Source :Agency news