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इंटरनेट मीडिया से हो रहे चुनाव प्रचार में ग्रामीण भारत का एक बड़ा वर्ग अछूता

जैसा कि आपको मालूम है कि कोविड-19 की गाइडलाईन को ध्यान में रखकर चुनाव आयोग ने वर्चुअल रैली और प्रचार प्रसार के निर्देश जारी किये थे। जैसा की आपको मालूम है कि इस वक्त देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैंऔर कोरोना की वजह से न तो रैलियां हो रही हैं और न ही रोड शो के जरिये राजनीतिक दल जनता के बीच अपना शक्ति प्रदर्शन ही कर पा रहे हैं।  लिहाजा सारा चुनाव प्रचार डिजिटल प्रारूप में ही सिमट कर रह गया है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की पाबंदी के कारण राजनीतिक दल और नेता इंटरनेट मीडिया के विभिन्न मंचों के जरिये जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में लगे हैं। इन्हीं मंचों पर अपनी प्रचार सामग्री को परोसकर पार्टियां चुनाव में अपनी स्थिति को मजबूत करने में जुटी हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए इस बार राजनीतिक पार्टियां लोकगीतों के रूप में अपने अपने प्रचार गीत बनवाकर  इंटरनेट मीडिया के मंचों पर उन्हें साझा करके जनता के दिलोदिमाग पर छा जाने को बेताब हैं। इस संग्राम में आगे निकल जाने की स्पर्धा लगभग सभी दलों में दिखाई दे रही है। ऐसे में यहां यह सवाल तैर रहा है कि लोकतंत्र के इस चुनावी त्योहार में क्या यह

ममता का जलवा बरकरार,केएमसी चुनाव में तृणमूल 137 सीटों पर आगे

 


 कोलकाता /  कोलकाता नगर निगम (केएमसी) चुनाव में भी सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस जबर्दस्त जीत की तरफ आगे बढ़ रही है। तृणमूल कांग्रेस 144 वार्डो में से 137 वार्डों में इस समय आगे हैं। अधिकतर सीटों के रुझान सामने आ चुके हैं जिसमें सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) एक बार फिर सब पर भारी दिख रही है। इधर, मतगणना के बीच तृणमूल कांग्रेस का जश्न भी शुरू हो गया है। कोलकाता के कालीघाट स्थित मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के घर के बाहर अभी से ही बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं का जुटना शुरू हो गया है। बता दें कि कोलकाता में 19 दिसंबर को संपन्‍न हुए नगर निगम चुनाव में लगभग 64 प्रतिशत मतदान हुआ था। आज नतीजे आने के साथ ही तय हो जाएगा कि तृणमूल कांग्रेस दोबारा कोलकाता नगर निगम चुनाव में कब्‍जा करने में कामयाब रहती है या भारतीय जनता पार्टी अपना जनाधार बढ़ाने में सफल होती है।2015 में कोलकाता नगर निगम चुनाव में सत्तारूढ़ टीएमसी ने 144 में से 114 वार्ड पर जीत दर्ज की थी। दूसरे स्थान पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) रही थी।

तृणमूल की आंधी में भी वार्ड नंबर 22 से भाजपा प्रत्याशी मीना देवी पुरोहित एक बार फिर अपनी सीट बचाने में कामयाब रहीं हैं। इस वार्ड से उन्होंने लगातार छठी बार जीत दर्ज की है।इससीटपरचुनावनतीजेकीघोषणाकीजाचुकीहै।विधानसभा चुनाव के बाद कोलकाता नगर निगम चुनाव में भी तृणमूल कांग्रेस जबरदस्त जीत की ओर आगे बढ़ रही है। कुल 144 वार्डो में से तृणमूल कांग्रेस137 सीटों पर इस समय आगे हैं।

कोलकाता नगर निगम चुनाव के नतीजे आने से पहले अभिषेक बनर्जी अब ममता बनर्जी के घर पहुंच चुके हैं। कुल 144 वार्ड में से 134 में TMCआगे चल रही है।

कोलकाता नगर निगम के चुनाव में भी जबर्दस्त जीत की तरफ तृणमूल कांग्रेस 144 वार्डो में से 114 वार्डों में वह इस समय आगे हैं।

 पिछली बार के नतीजे अगर हम देखे तो 2015 में कोलकाता नगर निगम चुनाव में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को 144 में से 114 वार्ड में जीत मिली थी। दूसरा स्थान माकपा को मिला था। जहां माकपा को 2010 की 33 सीटों के मुकाबले 2015 में केवल 15 सीट मिली थी। भाजपा को सात सीट मिली थी जो 2010 के तीन सीट के मुकाबले कुछ ज्यादा थी। वहीं, कांग्रेस को 2010 में आठ सीट के मुकाबले 2015 में पांच सीट मिली थी ।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कहा कि वह रविवार को हुए कोलकाता नगर निगम (केएमसी) चुनावों में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर धांधली को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन करने के अलावा कानूनी सहारा लेने पर विचार कर रही है। माकपा और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों ने केएमसी चुनावों के दौरान सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा धांधली और हिंसा का आरोप लगाया है, जिसमें लगभग 40.5 लाख मतदाताओं में से 63.63 प्रतिशत ने रविवार शाम पांच बजे तक अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

मतगणना केंद्रों के बाहर 200 मीटर की दूरी पर धारा 144 लागू की गई है। हर केंद्र पर त्रिस्‍तरीय सुरक्षा का खास इंतजाम किया गया है। किसी भी पार्टी कार्यकर्ता को इस दायरे में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है। सुरक्षा व्‍यवस्‍था का पूरा जिम्‍मा कोलकाता पुलिस को दिया गया है। कोरोना संक्रमण को ध्‍यान में रखते हुए मतगणना केंद्रों पर उपस्थित सभी एजेंटों के लिए कोविड वैक्‍सीन की दोनों खुराक लेना आवश्‍यक है।

पिछली बार के मुकाबले के नतीजे अगर हम देखें तो 2015 में कोलकाता नगर निगम चुनाव में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को 144 में से 114 वार्ड पर जीत मिली थी। दूसरा स्थान मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को मिला था। जहां माकपा को 2010 की 33 सीटों के मुकाबले 2015 में केवल 15 सीटों पर ही सफलता हासिल हुई थी।

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