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नए वेरिएंट फैलने की आशंका : आश्रमों और गेस्ट हाउस में भी देना होगा अब कोरोना जांच का प्रमाणपत्र

  मथुरा / उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में वृन्दावन शहर में दस विदेशी एवं एक देशी नागरिक के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी गेस्ट हाउसों एवं आश्रमों को कहा है कि वे अपने आने वाले हर देशी-विदेशी मेहमान का पूरा ब्योरा रखें और उनके पास कोरोना जांच का नेगेटिव प्रमाण पत्र होने के बाद ही उन्हें अपने यहां ठहराएं। गौरतलब है कि लंबे समय तक कोरोना वायरस का मामला नहीं आने के बाद बरती गई लापरवाही के बाद अब फिर से कोरोना संक्रमितों के मिलने का सिलसिला चल पड़ा है। वृन्दावन में पिछले सप्ताह से अब तक दस विदेशी एवं एक उड़ीसा की भारतीय नागरिक संक्रमित पाई जा चुकी है। तीन विदेशी जिला स्तर पर कोई सूचना दिए बिना यहां से लौट भी चुके हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रचना गुप्ता ने कहा है कि गेस्ट हाउस एवं आश्रम बाहर से आने वाले व्यक्तियों के रुकने से पूर्व उनके कोविड वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र एवं कोविड-19 जांच रिपोर्ट प्राप्त कर ही उन्हें ठहराएं तथा ऐसा नहीं होने पर वे तत्काल स्वास्थ्य विभाग के नियंत्रण कक्ष को रिपोर्ट करें। उनके अनुसार नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। न

उत्तरकाशी: केसर की खुश्बू से महकी हर्षिल घाटी, खिल उठे काश्तकारों के चेहरे



सीमांत जनपद की हर्षिल घाटी रसीले सेबों और राजमा के उत्पादन के लिए जानी जाती है। केसर की खेती के लिए घाटी का मौसम व मिट्टी मुफीद होने के चलते कृषि विज्ञान केंद्र ने वर्ष 2018-19 में पहले ट्रायल के तौर पर किसानों को केसर के बीज दिए थे। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए।


 हर्षिल घाटी में केसर उत्पादन की योजना परवान चढ़ती नजर आ रही है। योजना के तहत घाटी के पांच गांवों के काश्तकारों को केसर के बीज निशुल्क उपलब्ध कराए गए थे। इनमें से अधिकांश बीज अंकुरित हो गए हैं और उनपर फूल खिल गए हैं। ये देख काश्तकारों के चेहरे खिल गए हैं। 


इसे देखते हुए इस वर्ष जिला प्रशासन व उद्यान विभाग ने जिला योजना 2021-22 से घाटी के सुक्की, झाला, मुखबा, पुराली व जसपुर गांवों के करीब 38 किसानों को केसर के बीज दिए थे। किसानों ने क्यारियां तैयार कर इन्हें खेतों में बोया। एक से डेढ़ महीने में ही इन पर फूल खिलने शुरू हो गए हैं। इससे काश्तकार उत्साहित हैं। 


सुक्की गांव के किसान मोहन सिंह राणा ने बताया कि उन्हें 6 किलो बीज मिले थे, जो उन्होंने 22 सितंबर को बोए थे। एक महीने में ही इन पर फूल आने शुरू हो गए हैं। 15 अक्तूबर तक फूल आते रहेंगे। हर्षिल के काश्तकार नागेंद्र सिंह रावत ने भी केसर के बीज बोए थे। उनके खेतों में भी फूल खिल रहे हैं।

काश्तकारों को अच्छी गुणवत्ता का बीज दिया गया था। इसके चलते इस पर एक से डेढ़ माह में फूल आना शुरू हो गए हैं। अभी उत्पादन कम है। भविष्य में यह किसानों के आजीविका संवर्धन में सहायक होगा। 

-रजनीश सिंह, मुख्य उद्यान अधिकारी उत्तरकाशी 


कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ हर्षिल घाटी में उत्पादित हो रहे केसर की गुणवत्ता की जांच करेगा। केंद्र के उद्यान विशेषज्ञ डॉ. पंकज नौटियाल ने बताया घाटी के तीन गांवों की पांच जगहों से सैंपल लिए जाएंगे। इसके बाद लैब में केसर में मिलने वाले क्रोसिन, क्रोसेटिन व सेफ्रेनल तत्वों के आधार पर इसकी गुणवत्ता परखी जाएगी। इसमें कश्मीर के केसर का सैंपल भी रखा जाएगा।

इससे कश्मीर के केसर के साथ भी इसका तुलनात्मक परीक्षण होगा ताकि काश्तकारों को वाजिब दाम मिल सकें। डीएचओ रजनीश सिंह ने बताया कि कश्मीर के केसर के बीजों का मूल्य ज्यादा होने के चलते यमुनाघाटी के धारी कफनौल में स्थित एक नर्सरी से ही किसानों को बीज मुहैया कराएगा।



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