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त्रिपुरा हिंसा : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्‍य सरकार को दो हफ्ते के भीतर जवाब देने के दिए निर्देश

    नई दिल्‍ली /   सुप्रीम कोर्ट त्रिपुरा में हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामले में राज्य पुलिस की कथित मिली-भगत और निष्क्रियता के आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सोमवार को केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति डीवाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने सरकारों को दो हफ्ते के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है।  अधिवक्ता ई. हाशमी की ओर से दाखिल याचिका पर अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पैरवी की। उन्‍होंने सर्वोच्‍च अदालत से कहा कि वे हालिया साम्प्रदायिक दंगों की स्वतंत्र जांच चाहते हैं। इस मामले में अब दो हफ्ते बाद सुनवाई होगी। भूषण ने कहा कि सर्वोच्‍च अदालत के समक्ष त्रिपुरा के कई मामले लंबित हैं। पत्रकारों पर यूएपीए के आरोप लगाए गए हैं। यही नहीं कुछ वकीलों को नोटिस भेजा गया है। पुलिस ने हिंसा के मामले में कोई एफआइआर दर्ज नहीं की है। ऐसे में अदालत की निगरानी में इसकी जांच एक स्वतंत्र समिति से कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की प्रति केंद्रीय एजेंसी और

पाकिस्तान : दो गुटों के बीच झड़प में 11 की मौत, 15 हुए घायल,बढ़ी इमरान सरकार की मुश्किलें

 


 इस्लामाबाद /   उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान के कबायली इलाके में वन भूमि के विवादित कब्जे को लेकर दो गुटों के बीच हुई झड़प हुई। कुर्रम जिले के कोहाट डिवीजन में शिया-सुन्नी के बीच हुए संघर्ष में कम से कम 11 लोग मारे गए और 15 घायल हो गए। समाचार एजेंसी एएनआइ ने एक विश्वसनीय सूत्र के अनुसार बताया कि विवादित पर्वतीय जंगलों में पेड़ों की कटाई को लेकर दो समूहों के बीच झड़प हुई।

सूत्र ने कहा कि अब तक दोनों पक्षों की ओर से हुई गोलीबारी में 11 लोग मारे गए हैं और 15 घायल हुए हैं। इस दौरान भारी हथियारों का इस्तेमाल किया गया और कल से लड़ाई जारी है।

 शांति बहाल करने के लिए पुलिस को तैनात किया गया है।बता दें कि पाकिस्तान बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा का सामना कर रहा है, अल-कायदा और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़े सशस्त्र सुन्नी समूह अक्सर शियाओं की सभाओं पर हमला करते हैं, जो देश की मुस्लिम आबादी का लगभग 20 फीसद हिस्सा हैं।

वहीं, दूसरी ओर प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी समूहों के आगे प्रधानमंत्री इमरान खान ने घुटने टेक दिए हैं। प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी समूह तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) ने चेतावनी दी थी कि उसके कार्यकर्ता मंगलवार शाम तक इस्लामाबाद की ओर बढ़ेंगे। 

यही वजह है कि प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी समूह के दबाव में पाकिस्तान सरकार ने रविवार को तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के 350 से अधिक कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया। इतना ही नहीं टीएलपी ने घोषणा की कि बुधवार तक बाकी कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमें भी वापस ले लिए जाएंगे।

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