आलेख-भारत में ट्रेंड इन दिनों

 

  प्रफुल्ल सिंह "बेचैन कलम"

आइकन्स.... आज की तारीख में चाइना 32 गोल्ड के साथ 71 मेडल लेकर शीर्ष पर है। अमेरिका 27 गोल्ड सहित 84 मेडल के साथ द्वितीय, जापान 21 गोल्ड 40 मेडल के साथ तीसरा और ऑस्ट्रेलिया 17 गोल्ड 38 के साथ चौथे ब्रिटेन 15 गोल्ड 49 मेडल लेकर पांचवे नम्बर पर है और भारत 1 सिल्वर, 3 ब्रांज के साथ 4 मेडल लेकर 66 स्थान पर है।

और हमारे यहां ट्रेंड कर रहा है "जानू मेरी जानेमन बचपन का प्यार मेरा भूल न जाना रे।" एक मुख्यमंत्री उस बच्चे से मिलकर उसे सुपरस्टार का दर्जा दे रहा है। मानो वह टोक्यो से गोल्ड ले आया हो। इसमें गलती उस बच्चे की भी नहीं है, वह तो बस एक मोहरा भर है। इसके पीछे पूरी एक टीम लगी होगी, जो जबर्दस्ती उसे सुपरस्टार बनाने पर तुली है। ताकि उसे बच्चों का आइडल बनाया जा सके। क्योंकि आजकल हर बच्चे के हाथ स्मार्टफोन है। स्कूल बंद हैं सो भरपूर टाइम भी है।

जिस उम्र में चीन, अमेरिका, थाई, मलेशियाई बच्चे स्पोर्ट स्कूल में दाखिला लेकर अपने गोल्ड वाले सपने की तरफ पहला कदम बढ़ाते हैं। उस उम्र है हमारे बच्चे आजकल टिकटोक टाइप वीडियो बनाना सीख रहे हैं। पुनः कहूंगा गलती उनकी नहीं बल्कि वह स्वयं एक षड्यंत्र का शिकार हैं और शिकारी कहीं सुदूर बैठा है।

गलती उनके अभिभावकों की होनी चाहिए। की वह अपने बच्चों की मॉनिटरिंग तक नहीं कर पा रहे हैं। वह अपने गेजेट्स पर क्या करता है क्या नहीं यह देखने का उन्हें समय नहीं है। आज फिर याद आता है, जब हम गूगल, पेप्सिको के भारतीय सीईओ होने वाली ढींगे हांकते हैं तो याद आता है कि ऊपरवाले का शुक्र है उस समय हर हाथ में मोबाइल नहीं था.. वरना कोई पिचाई, नूयी भी अपनी जिंदगी वीडियो बनाने में ही खर्च देते।

पुनः अपने बच्चों को मॉनिटर कीजिए, उन्हें अपने असल हीरोज के विषय में बताइए, पढ़ाइए, दिखाइए। वरना कोई गेम उनके भविष्य के साथ गेम कर जाएगा। जैसा कि अभी 2 दिन पहले छतरपुर में हुआ। उनकी अथाह ऊर्जा को सही जगह लगाइए, उसका सदुपयोग उनके और देश के बेहतर भविष्य में कीजिए। और कमसे कम बच्चों को इस झूठी स्टारडम से जितना हो सके बचाके रखिए।

यह कोमल हृदय जल्द मुरझा जाते हैं। फिर ऐसे अवसाद में डूबते हैं कि जीवनभर बाहर नहीं आ पाते। याद कीजिए उन बच्चों को जिन्होंने कभी "हवा हवा ए हवा खुशबू लुटा दे" या "आप जैसा कोई मेरी जिंदगी में आए तो बात बन जाए" गाया था। यह चार की चांदनी फिर अंधेरी रात जैसी चमक है। इसके डूबे ऐसे डूबे की फिर दोबारा उभर ही न पाए।

इसलिए बच्चों को इस झूठे स्टारडम से बचाइए। स्थायी सफलता सिर्फ गहन संघर्ष से ही आती है। शॉर्टकट से आने वाली सफलता एक रोज शार्ट सर्किट सा सब खाक कर देती है।


लखनऊ, उत्तर प्रदेश
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